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अररिया में फिर धंसा 4 करोड़ का पुल, यातायात ठप

SHIDDHANT
4 Nov 2025 12:27 AM IST
सांकेतिक तस्वीर (AI)
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सड़क संपर्क टूटा
Bihar बिहार: एक बार फिर भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खुल गई है। अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड के कौआचार गांव में सोमवार दोपहर करोड़ों की लागत से बना पुल अचानक ध्वस्त हो गया। यह पुल करीब 3.80 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2019 में बनाया गया था। परमान नदी पर बने इस पुल के ढहने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। यह वही गांव है जो अररिया के भाजपा सांसद प्रदीप कुमार सिंह का पैतृक गांव है।
बताया जा रहा है कि पुल के जर्जर होने के कारण पिछले कुछ महीनों से इस पर आवागमन बंद था। इसके बावजूद आसपास के लोग पुल के पास से गुजरते थे। सोमवार को अचानक पुल का एक स्पेन धंस गया, जिससे पुल पूरी तरह से उपयोग के अयोग्य हो गया। घटना के बाद पटेगना, फारबिसगंज और सिकटी का सड़क संपर्क टूट गया है।
यह हादसा ग्रामीण कार्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाता है। करोड़ों की लागत से बने पुल का मात्र तीन साल में जर्जर होना निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री और भ्रष्टाचार हुआ था। उनका कहना है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से पुल कमजोर बना और अब जनता इसकी कीमत चुका रही है।
यह पहली बार नहीं है जब अररिया जिले में पुल गिरा हो। इससे पहले 18 जून 2024 को सिकटी प्रखंड के पड़रिया गांव में बकरा नदी पर 12 करोड़ की लागत से बन रहा पुल भी ढह गया था। वह पुल भी इसी विभाग के तहत बनाया जा रहा था। अब फारबिसगंज में दूसरा पुल गिरने से ग्रामीण कार्य विभाग की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल उठ गए हैं।
ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर चंद्रशेखर कुमार ने बताया कि पुल के कमजोर होने की जानकारी पहले ही विभाग को दी गई थी। “30 अक्टूबर 2025 को विभाग को पत्र भेजा गया था। आज की घटना के बाद डीएम और एसपी को सूचित किया गया है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।” उन्होंने कहा कि संवेदक की गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन पुल की गुणवत्ता और निर्माण में गड़बड़ी की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने बिहार में चुनावी माहौल के बीच सियासी हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि “बिहार में पुल नहीं, भ्रष्टाचार की नींव मजबूत की जा रही है।
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