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32 दिन की मेहनत
असम। दुर्गा पूजा से पहले असम के धुबरी जिले में 17 वर्षीय छात्र दर्शिल ने अपनी अनोखी कलाकारी से लोगों का ध्यान खींचा है। बी.एन. कॉलेज में पढ़ने वाले दर्शिल ने धान के दानों का इस्तेमाल कर मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा तैयार की है। इस कलाकृति को बनाने में उन्हें पूरे 32 दिन लगे। उनकी बनाई प्रतिमा इस वर्ष डी.के. रोड सार्वजनिक काली मंदिर के दुर्गा पूजा पंडाल में स्थापित की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, दर्शिल ने पारंपरिक प्रतिमा निर्माण से अलग हटकर धान के दानों का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी रचनात्मक सोच और मेहनत से मां दुर्गा का स्वरूप तैयार किया। इस अनोखी कलाकृति को बनाने के लिए उन्हें धैर्य और बारीकी से काम करना पड़ा।
महज 17 साल की उम्र में दर्शिल की यह पहल कला के प्रति उनकी रुचि और समर्पण को दर्शाती है। पढ़ाई के साथ उन्होंने प्रतिमा निर्माण के लिए 32 दिनों का समय दिया। धान के दानों से तैयार इस प्रतिमा की सबसे खास बात इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री है।
इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान डी.के. रोड सार्वजनिक काली मंदिर के पंडाल में आने वाले श्रद्धालु इस अनोखी प्रतिमा को देख सकेंगे। पारंपरिक पूजा आयोजन के बीच धान से निर्मित प्रतिमा एक अलग आकर्षण होगी। असम में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां चल रही हैं। विभिन्न स्थानों पर कलाकार अलग-अलग सामग्रियों से मां दुर्गा की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। धुबरी में भी सुरक्षा पिन और इस्तेमाल किए गए पेन से बनी दुर्गा प्रतिमाओं की खबरें सामने आई हैं। दर्शिल की यह कलाकृति दिखाती है कि सामान्य कृषि उपज को भी कलात्मक स्वरूप दिया जा सकता है। उनकी मेहनत युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा का उदाहरण है।
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