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72 वर्षीय श्रीदेवी का साहस और प्रेम बना मिसाल, पति को बचाने के लिए नहर में कूदी
Shantanu Roy
24 Aug 2025 9:23 PM IST

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परिजन सदमें में
Firozabad. फिरोजाबाद। अक्सर लोग कहते हैं कि पति-पत्नी का रिश्ता जन्मों-जन्मों का होता है, लेकिन कभी-कभी इस रिश्ते की गहराई ऐसी कहानियों में झलकती है, जो समाज के लिए प्रेरणा और आंखों में आंसू दोनों छोड़ जाती हैं। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के जवापुर गांव में ऐसी ही एक दर्द भरी लेकिन साहस से भरी घटना सामने आई, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया। 72 वर्षीय श्रीदेवी ने अपने पति रामलड़ैते (75 वर्ष) को बचाने के लिए न केवल अपनी जान दांव पर लगा दी, बल्कि तैरना न जानते हुए भी तेज बहाव वाली नहर में कूद गईं। लगभग आठ किलोमीटर तक वह अपने पति का हाथ थामे बहती रहीं। ग्रामीण इस वाकये को "चमत्कार" मान रहे हैं कि श्रीदेवी बच गईं, लेकिन दुर्भाग्यवश उनके पति की सांसें थम गईं।
घर में विवाद से उपजा हादसा
यह घटना शुक्रवार सुबह की है। जानकारी के अनुसार, फिरोजाबाद के जलेसर रोड स्थित झलकारी नगर की गली नंबर तीन में रहने वाले रामलड़ैते और श्रीदेवी के परिवार में चार बेटे और बहुएं हैं। सादगी और मेहनत से जीवन बिताने वाला यह बुजुर्ग दंपती अपने बेटों और बहुओं के साथ रह रहा था। लेकिन शुक्रवार की सुबह तकरीबन साढ़े पांच बजे घर में कहासुनी हो गई। विवाद के बाद नाराज होकर रामलड़ैते घर छोड़कर निकल पड़े। उनकी हालत कमजोर थी और चलने के लिए बैसाखी का सहारा लेना पड़ता था। पत्नी श्रीदेवी, जो खुद भी लाठी का सहारा लेकर चलती हैं, पति के पीछे-पीछे घर से निकल पड़ीं। बताया जाता है कि दोनों अपने मायके छिबरामऊ (कन्नौज) जाने की तैयारी में थे। वे रेलवे स्टेशन पहुंचे लेकिन ट्रेन छूट जाने के कारण उन्होंने ऑटो से घिरोर की ओर जाने का फैसला किया।
अचानक छलांग और प्रेम का इम्तिहान
घिरोर पुल पर पहुंचने के बाद रामलड़ैते ने ऑटो ड्राइवर से कहा कि वह शौच जाना चाहते हैं। श्रीदेवी भी ऑटो से उतर गईं। लेकिन अगले ही पल ऐसा हादसा हुआ जिसने सभी को हिला दिया। रामलड़ैते ने अचानक बैसाखी छोड़कर इटावा ब्रांच नहर में छलांग लगा दी। पति को बचाने की भावना में श्रीदेवी भी बिना कुछ सोचे-समझे नहर में कूद पड़ीं। तैरना न जानने के बावजूद उन्होंने अपने पति का हाथ मजबूती से पकड़ लिया। नहर का बहाव इतना तेज था कि दोनों साथ-साथ बहने लगे। श्रीदेवी ने आठ किलोमीटर तक बहते हुए भी पति का हाथ नहीं छोड़ा।
ग्रामीणों ने बचाया, लेकिन नियति हारी
जवापुर पुल के पास जब ग्रामीणों ने देखा कि नहर में दो लोग बह रहे हैं, तो तुरंत मौके पर दौड़े। श्रीदेवी जोर-जोर से चिल्ला रही थीं और मदद की गुहार लगा रही थीं। ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए दोनों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। रामलड़ैते की मौत हो चुकी थी। ग्रामीणों ने कहा कि श्रीदेवी का बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं। जवापुर के निवासी विपिन प्रताप सिंह ने बताया कि नहर का पानी बहुत तेज था और इतनी दूरी तक बहने के बावजूद उनका जिंदा निकलना असाधारण साहस और प्रेम का उदाहरण है।
श्रीदेवी की पीड़ा, आंसुओं में छलका दर्द
श्रीदेवी ने रोते हुए बताया, “वह शौच के बहाने उतरे और अचानक नहर में कूद गए। मैंने उनका हाथ पकड़ा, उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन मैं भी बह गई। तैरना नहीं आता था, फिर भी मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी।” उनकी आंखों में पति के खोने का गहरा दर्द साफ झलक रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने पति को बचाने के लिए जिस तरह साहस दिखाया, वह स्त्री शक्ति और वैवाहिक प्रेम का अद्भुत उदाहरण है।
घरेलू विवाद पर परिवार ने साधी चुप्पी
रामलड़ैते के चारों बेटे मजदूरी करते हैं। सबसे छोटे बेटे सीतराम ने बताया कि पिता के कूल्हे में गंभीर समस्या थी, जिसके कारण वे बैसाखी के सहारे चलते थे। वहीं मां भी लाठी के सहारे ही चल पाती हैं। परिवार ने घरेलू विवाद के मुद्दे को दबाने की कोशिश की और कहा कि माता-पिता छिबरामऊ (कन्नौज) जाने की बात कहकर निकले थे। शनिवार को रामलड़ैते का अंतिम संस्कार किया गया। पूरे गांव में इस घटना की चर्चा है और लोग श्रीदेवी के प्रेम और साहस की मिसाल दे रहे हैं। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच अटूट रिश्ते और त्याग की सच्ची कहानी है। जहां अक्सर लोग रिश्तों में स्वार्थ और दूरियों की बातें करते हैं, वहीं श्रीदेवी ने अपने पति को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
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