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38 साल बाद जेल से बाहर आया 72 वर्षीय कैदी, परप्पना अग्रहारा जेल से रिहाई पर भावुक पल

Shantanu Roy
6 July 2026 7:46 PM IST
38 साल बाद जेल से बाहर आया 72 वर्षीय कैदी, परप्पना अग्रहारा जेल से रिहाई पर भावुक पल
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New Delhi/Bengaluru. नई दिल्ली/बेंगलुरु। करीब चार दशक तक ऊंची जेल की दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच कैद रहने के बाद आखिरकार 72 वर्षीय साइबन्ना एन. नाटीकर को आज़ादी की हवा नसीब हुई। सोमवार को जब उन्होंने बेंगलुरु स्थित परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल का मुख्य द्वार पार किया, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। 38 साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई एक भावुक क्षण बन गई।

सूत्रों के अनुसार, साइबन्ना एन. नाटीकर को कई दशक पहले एक गंभीर मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद उन्हें लंबी सजा सुनाई गई थी। समय के साथ उन्होंने जेल में ही अपना अधिकांश जीवन बिता दिया। इस दौरान उनकी उम्र बढ़ती गई, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया और सजा की अवधि पूरी होने तक उन्हें जेल में ही रहना पड़ा। सोमवार को जब उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई, तो जेल परिसर में एक अलग ही माहौल देखने को मिला। जेल अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी उनके लंबे कारावास को देखते हुए भावनात्मक विदाई दी।

बताया जा रहा है कि रिहाई के समय वे काफी कमजोर और धीमे कदमों से चल रहे थे। जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने कुछ पल के लिए रुककर आसपास देखा। इतने वर्षों बाद खुली हवा और बाहर की दुनिया को देखकर वे भावुक हो गए। वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें सहारा दिया और उनके साथ बातचीत की। जानकारी के अनुसार, अपने जीवन के 38 साल से अधिक समय उन्होंने परप्पना अग्रहारा जेल में बिताए, जहां उन्होंने जेल नियमों का पालन करते हुए समय गुजारा। इस दौरान उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना किया और लंबे समय तक परिवार से दूर रहे।

रिहाई के बाद उनके परिजनों के मिलने की भी संभावना जताई जा रही है। लंबे समय बाद अपने घर लौटने की उम्मीद ने उनके जीवन में नई आशा जगाई है। हालांकि उनकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए आगे की देखभाल और सहायता की आवश्यकता होगी। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि लंबी सजा पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें रिहा किया गया है। इस दौरान सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं। यह मामला न केवल एक व्यक्ति के लंबे कारावास की कहानी है, बल्कि न्याय प्रणाली, सजा और मानवीय संवेदनाओं पर भी चर्चा का विषय बन गया है। 38 साल बाद मिली आज़ादी ने हर किसी को भावुक कर दिया।
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