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घोटाले
Ahmedabad अहमदाबाद: क्राइम ब्रांच ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि वे इलेक्ट्रॉनिक वेब्रिज (तौल मशीन) सिस्टम में हेरफेर कर स्क्रैप (पुराने सामान) के लेनदेन के दौरान कंपनियों के साथ धोखाधड़ी करने वाला एक जटिल अंतरराज्यीय गिरोह चला रहे थे। क्राइम ब्रांच के अनुसार यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और स्क्रैप सामग्री की तौल में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वेब्रिज मशीनों से छेड़छाड़ कर धोखाधड़ी करता था। यह मामला विशेष खुफिया जानकारी मिलने के बाद सामने आया, जिसके बाद जांचकर्ताओं ने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड जांच की। पुलिस ने बताया कि आरोपी वेब्रिज मशीनों में विशेष चिप्स लगाते थे, जिससे वे वजन दिखाने वाली प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकें। वे रिमोट कंट्रोल डिवाइस का इस्तेमाल कर वजन की रीडिंग बदल देते थे और गलत वेट स्लिप तैयार करते थे, जिनमें वास्तविक वजन से कम वजन दिखाया जाता था।
इससे उन्हें स्क्रैप खरीद में अवैध लाभ मिलता था। निरीक्षक निखिल ब्रह्मभट्ट ने कहा, 'गुजरात और आसपास के राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में कई स्क्रैप व्यापारी और बड़ी कंपनियां हैं, जहां स्क्रैप टेंडर जारी किए जाते हैं। इन टेंडरों में यह गिरोह सबसे ऊंची बोली लगाता था और फिर धोखाधड़ी करता था। हमने इस गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों द्वारा जारी स्क्रैप टेंडरों में भाग लेते थे या नीलामी के जरिए स्क्रैप प्राप्त करते थे। डील मिलने के बाद वे अपने तकनीकी जानकार सहयोगियों की मदद से साइट पर लगे वेब्रिज सिस्टम से छेड़छाड़ करते थे और स्क्रैप का वजन कम दिखाकर स्क्रैप यार्ड संचालकों और साइट मालिकों को धोखा देते थे।
पक्की सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच टीम ने छापेमारी कर सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक क्राइम ब्रांच अधिकारी ने बताया, 'हमें उनके इकट्ठा होने की पुख्ता सूचना मिली थी। सभी सात आरोपियों को अहमदाबाद के वटवा जीआईडीसी से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस धोखाधड़ी का अनुमानित दायरा 50 करोड़ से 100 करोड़ रुपए के बीच है और इसमें कई बड़ी कंपनियां प्रभावित हुई हैं। अधिकारी ने कहा, ''हमने कंपनियों से जांच में शामिल होने के लिए संपर्क किया है। हमें यह भी शक है कि सुरक्षा गार्ड जैसे कर्मचारी भी इस ऑपरेशन में शामिल हो सकते हैं। अधिकारी ने आगे बताया कि इस गिरोह का कथित मास्टरमाइंड मध्य प्रदेश का रहने वाला रजनीश कश्यप है, जो फिलहाल फरार है। अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "नोएडा और नई दिल्ली के दो अन्य व्यक्तियों की भी इस धोखाधड़ी से जुड़ाव होने की आशंका है।”
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेमंतकुमार रावल (33), संकेट रावल (24), विजय ठाकोर (36), मनीष रबारी (27), विनोद पटनी (36), मुकेश पटनी (31) और सुनील पटनी (36) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि ये सभी अहमदाबाद और आसपास के जिलों के निवासी हैं और उनके मूल स्थान मेहसाणा, साबरकांठा, बनासकांठा, गांधीनगर और पाटन हैं। अधिकारियों ने बताया कि मामले में छह अन्य लोगों को वांछित घोषित किया गया है, जिनमें रजनीश कश्यप, चिराग गोस्वामी उर्फ चिराग बावा, सुनील बोडी, विनोद चंपो, अशोक गुगो और संजय पटनी शामिल हैं। अभियान के दौरान पुलिस ने 80 हजार रुपए मूल्य की चार इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, 65 हजार रुपए मूल्य के 13 रिमोट कंट्रोल डिवाइस, 2.65 लाख रुपए मूल्य के 12 मोबाइल फोन और 15 लाख रुपए मूल्य की एक कार जब्त की। जब्त संपत्ति की कुल कीमत लगभग 19.10 लाख रुपए आंकी गई है।
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