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राजस्थान हाईकोर्ट में 37 जजों को मिली नई जिम्मेदारी, नए सीजे ने बदली गार्जियन जज व्यवस्था
jantaserishta.com
27 Sept 2026 2:56 PM IST

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नई दिल्ली: राजस्थान हाईकोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने हाईकोर्ट के 37 न्यायाधीशों को अलग-अलग जिलों की नई गार्जियन जज जिम्मेदारियां सौंपी हैं। यह नई व्यवस्था न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने, पदोन्नति और तबादलों के बाद लागू की गई है। हाईकोर्ट का यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावी माना गया है।
नई व्यवस्था के तहत कुछ न्यायाधीशों को एक जिले की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कुछ जजों को दो जिलों की गार्जियनशिप सौंपी गई है। इसका उद्देश्य संबंधित जिलों की न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक मामलों की निगरानी और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना है।
किन जजों को मिली प्रमुख जिलों की जिम्मेदारी?
नई सूची में जस्टिस विनीत कुमार माथुर को जोधपुर महानगर और उदयपुर की जिम्मेदारी दी गई है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह को जयपुर महानगर-I और जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल को जयपुर महानगर-II का गार्जियन जज बनाया गया है।
इसी तरह जस्टिस अरुण मोंगा को भीलवाड़ा और प्रतापगढ़, जस्टिस फरजंद अली को बीकानेर और डूंगरपुर, जस्टिस रेखा बोराणा को चित्तौड़गढ़ और जैसलमेर तथा जस्टिस कुलदीप माथुर को पाली और फलोदी की जिम्मेदारी मिली है। जस्टिस नूपुर भाटी को हनुमानगढ़ और सलूंबर का गार्जियन जज बनाया गया है।
इसके अलावा कोटा, अजमेर, अलवर, भरतपुर, सीकर, झुंझुनूं, दौसा, टोंक, चूरू, बूंदी, झालावाड़, बारां, धौलपुर, सवाई माधोपुर और अन्य जिलों के लिए भी अलग-अलग न्यायाधीशों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सेवानिवृत्ति और तबादलों के बाद किया गया पुनर्गठन
हाईकोर्ट प्रशासन के अनुसार, पहले जारी गार्जियन जजों की व्यवस्था में समय के साथ बदलाव की जरूरत थी। कुछ न्यायाधीश सेवानिवृत्त हुए, कुछ को पदोन्नति मिली और कुछ के तबादले हुए। इन्हीं बदलावों के बाद जिलों का नए सिरे से आवंटन किया गया है।
नए आदेश के बाद संबंधित न्यायिक क्षेत्रों में अब गार्जियन जज की जिम्मेदारी नई सूची के अनुसार होगी। हाईकोर्ट के आदेश में पुराने संबंधित आवंटनों को संशोधित करते हुए नई व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है।
गार्जियन जज का क्या काम होगा?
गार्जियन जज की भूमिका केवल संबंधित जिले का दौरा करने तक सीमित नहीं है। उन्हें अपने अधिकार क्षेत्र में न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर मुख्य न्यायाधीश को सलाह देनी होगी।
आदेश के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों की दक्षता और सत्यनिष्ठा से संबंधित मामलों में भी गार्जियन जज मुख्य न्यायाधीश को आवश्यक सलाह देंगे। इससे संबंधित जिलों की न्यायिक व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी हाईकोर्ट के स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
जिला दौरे से पहले देनी होगी जानकारी
गार्जियन जजों को अपने संबंधित जिलों के दौरे से पहले प्रस्तावित कार्यक्रम की जानकारी मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में लानी होगी। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि दौरे का कार्यक्रम इस तरह बनाया जाए, जिससे अदालतों के नियमित कामकाज पर कम से कम असर पड़े।
यानी जिला निरीक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच अदालतों की नियमित सुनवाई प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखना होगा।
आदेश सभी संबंधित अदालतों तक पहुंचेगा
नई व्यवस्था से जुड़ा आदेश हाईकोर्ट की दोनों पीठों के प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजा गया है। जिला न्यायाधीशों को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश की जानकारी अपने अधीन आने वाली संबंधित अदालतों और जिला जज स्तर के न्यायाधिकरणों तक पहुंचाएं।
इस बदलाव के बाद राजस्थान के अलग-अलग न्यायिक जिलों के लिए गार्जियन जजों की जिम्मेदारियां नए सिरे से तय हो गई हैं। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होने के कारण अब संबंधित न्यायिक क्षेत्रों में प्रशासनिक समन्वय इसी आवंटन के आधार पर किया जाएगा।
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