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ममता के करीबी रहे मदन मित्रा का बड़ा फैसला, पार्टी में मचा सियासी भूचाल
Kolkata: कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लंबे समय से करीबी माने जाने वाले मदन मित्रा ने बागी नेता ऋतब्रत के खेमे में शामिल होने का ऐलान किया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक संकट का संकेत मान रहे हैं।
गौरतलब है कि जून महीने में मदन मित्रा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह जीवनभर ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहेंगे। हालांकि, लगभग एक महीने बाद उन्होंने बागी गुट का साथ चुन लिया। बागी खेमे में शामिल होने के बावजूद उन्होंने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि उनके मन में मुख्यमंत्री के प्रति सम्मान आज भी कायम है। मदन मित्रा ने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले संगठन में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पार्टी में मौजूदा संकट और संगठनात्मक समस्याओं के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।
मदन मित्रा और ममता बनर्जी का राजनीतिक संबंध करीब तीन दशक पुराना रहा है। राजनीति में आने से पहले मदन मित्रा टैक्सी चालक और ट्रेड यूनियन नेता थे। दोनों नेताओं ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस से की थी। वर्ष 1993 में 21 जुलाई के युवा कांग्रेस आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग के समय भी मदन मित्रा, ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े रहे थे। हालांकि, यह कहना कि मदन मित्रा का दल बदलना ममता बनर्जी के लिए "ताबूत में आखिरी कील" साबित होगा, अभी एक राजनीतिक आकलन है, स्थापित तथ्य नहीं। आने वाले समय में टीएमसी की आंतरिक स्थिति और राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि इस फैसले का पार्टी पर कितना प्रभाव पड़ता है।
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