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नई दिल्ली (आईएएनएस)| कंपनी मामलों के राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के तहत 1,807 मामलों का निपटारा किया गया। इनमें से 429 मामलों में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है और 1,378 परिसमापन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। समाधान में देरी के कारणों पर जवाब में कहा गया, परिसमापक द्वारा समाधान और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने में देरी कॉपोर्रेट देनदार की संपत्ति पर नियंत्रण लेने में समस्या, संपत्ति की वसूली, अत्यधिक मुकदमेबाजी, लंबित परिहार जैसे कारणों से होती है।
भारतीय दिवालियापन और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) (परिसमापन प्रक्रिया) विनियम, 2016 के विनियम 35 को अक्टूबर, 2018 में संशोधित किया गया था, ताकि यह प्रावधान किया जा सके कि परिसमापक कॉपोर्रेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के तहत प्राप्त मूल्यांकन पर विचार कर सकता है।
आईबीबीआई ने परिसमापन संपत्तियों की नीलामी के सार्वजनिक नोटिसों की मेजबानी के लिए अपनी वेबसाइट पर एक इलेक्ट्रॉनिक मंच भी प्रदान किया है।
मंत्रालय ने अपने उत्तर में सूचित किया कि परिसमापन विनियमों के विनियम 37 के साथ पठित संहिता की धारा 52 परिसमापन कार्यवाही में एक सुरक्षित लेनदार द्वारा सुरक्षा हित को त्यागने के लिए तंत्र और तरीके प्रदान करती है।
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