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नगर निगम के 160 करोड़ रुपये गायब, उड़े अफसरों के होश

jantaserishta.com
25 March 2026 12:25 PM IST
नगर निगम के 160 करोड़ रुपये गायब, उड़े अफसरों के होश
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पंचकूला: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से हाल ही में हरियाणा सरकार का 590 करोड़ रुपये गबन करने का मामला सामने आया था. जिसकी जांच चल ही रही थी कि राज्य से एक और स्कैम का मामला सामने आ गया है. अब एक और प्राइवेट बैंक द्वारा सरकार के पैसे गबन कर लिए गए. बताया जाता है कि पंचकूला नगर निगम ने 160 करोड़ रुपये का कोटक महिंद्रा बैंक में एफडी किया था. लेकिन एफडी की मैच्योरिटी से पहले फर्जी अकाउंट खोलकर पैसे ट्रांसफर कर लिए गए. फिलहाल निगम ने बैंक के खिलाफ FIR दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और हरियाणा सरकार को मामले की जांच के लिए एक पत्र भी लिखा है.
दरअसल कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों पर पंचकूला नगर निगम के 160 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगा है. आरोप है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के नाम पर जमा कराई गई ये राशि फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दी गई और निगम को केवल कागजी रिकॉर्ड थमाए जाते रहे.
मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपये की एक FD की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने को कहा. बैंक द्वारा दिए गए स्टेटमेंट में राशि ट्रांसफर दिखाई गई, लेकिन वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. जांच में पता चला कि स्टेटमेंट भी फर्जी था और रकम गायब है. इसके बाद जब नगर निगम ने अन्य FD को भी मैच्योर कर खाते में ट्रांसफर करने को कहा तो चौंकाने वाला खुलासा.
इस दौरान पाया कि बैंक द्वारा दी गई सभी FD जाली थीं और खाते में कोई राशि मौजूद नहीं थी. आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए लंबे समय तक इस गबन को छुपाए रखा. मामले में बैंक कर्मचारियों के साथ ही नगर निगम के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता की भी आशंका है.
फिलहाल पूरे मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शुरू कर दी है. टीम को आशंका है कि इस मामले में नगर-निगम के कर्मचारियों की मिलीभगत थी. हाल ही में आईडीएफसी बैंक चंडीगढ़ की एक खास ब्रांच में हरियाणा राज्य सरकार के कुछ खास खातों में कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों ने मिलकर 590 करोड़ रुपये का घोटाला किया था. हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अभी इस मामले की जांच कर रहा है और उसने कई गिरफ्तारियां भी की हैं.
IDFC First Bank ने पहले कहा था कि यह घोटाला हरियाणा सरकार से जुड़े खातों के एक खास समूह तक ही सीमित है. जिनका संचालन चंडीगढ़ ब्रांच से होता था. बैंक ने यह भी बताया था कि उसे हरियाणा सरकार के एक विभाग से चंडीगढ़ ब्रांच में अपना खाता बंद करने और उसमें जमा रकम को किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध मिला था.
इस प्रक्रिया के दौरान बैंक ने पाया कि खाते में मौजूद रकम और हरियाणा सरकार के विभाग द्वारा बताई गई रकम में अंतर था. यह अंतर 490 करोड़ रुपये का था और बैंक ने 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त गड़बड़ी भी पकड़ी. जिससे कुल गड़बड़ी की रकम बढ़कर 590 करोड़ रुपये हो गई.
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