
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का असर अब खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले भारतीयों पर भी दिखाई दे रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 से अब तक खाड़ी इलाके में 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन लोग अभी भी लापता हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा हालात गंभीर बने हुए हैं। संघर्ष का सबसे ज्यादा असर समुद्री मार्गों और कमर्शियल शिपिंग गतिविधियों पर पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने बताया कि 28 फरवरी के बाद से खाड़ी देशों में हुई घटनाओं में कई भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। ये घटनाएं उस समय से जुड़ी हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमले किए, जिसके बाद तनाव तेजी से बढ़ गया। देखते ही देखते यह संघर्ष क्षेत्रीय संकट में बदल गया और इसका असर समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वहां काम करने वाले विदेशी नागरिकों पर पड़ने लगा।
खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं का परिवहन होता है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
भारत ने भी खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है। भारतीय अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाई जा रही है।
खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं। इनमें शिपिंग, निर्माण, तेल और गैस क्षेत्र समेत कई उद्योगों से जुड़े लोग शामिल हैं। क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारतीय कामगारों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा में कमी आने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत सरकार खाड़ी क्षेत्र में रह रहे और काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारतीय नागरिकों की मौत और लापता होने की घटनाओं ने एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को उजागर किया है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।





