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Apple कस्टमर सर्विस बनकर विदेशियों से ठगी, 11 आरोपी गिरफ्तार

SHIDDHANT
2 Sept 2026 12:07 AM IST
Apple कस्टमर सर्विस बनकर विदेशियों से ठगी, 11 आरोपी गिरफ्तार
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किराए के मकान से चल रहा था इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर
Gurugram गुरुग्राम। गुरुग्राम पुलिस ने विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पालम विहार में कथित रूप से फर्जी कॉल सेंटर चलाने के आरोप में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य खुद को एप्पल कस्टमर सर्विस का प्रतिनिधि बताकर अमेरिका के नागरिकों को तकनीकी खराबी और वायरस का डर दिखाते थे और उनसे हजारों डॉलर की रकम ठगते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 लैपटॉप, 20 मोबाइल फोन, दो हेडफोन-माइक, दो कार, एक बाइक और एक स्कूटी बरामद करने की जानकारी दी है।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध पश्चिम थाना की टीम को पालम विहार के एक मकान में बिना अनुमति कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना मिली थी। इसके बाद 1 सितंबर को पुलिस टीम ने जे-ब्लॉक स्थित एक मकान पर छापेमारी की। पुलिस का दावा है कि मौके पर मौजूद लोग लैपटॉप, मोबाइल और हेडसेट की मदद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नागरिकों से अंग्रेजी में बातचीत कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रितपाल सिंह, मोहम्मद रिजान अंसारी, चैतन्य गोयल, मनीष, शाहरुख अंसारी, संजीव पांडे, शिवम, आदित्य, दीपक त्रिवेदी, वरुण गौतम और नीरज के रूप में बताई गई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि प्रितपाल सिंह कथित कॉल सेंटर में टीम लीडर की भूमिका निभा रहा था। यह सेंटर पिछले दो से तीन महीनों से किराए के मकान में चलाया जा रहा था। कॉल करने वाले लोगों को कमीशन के आधार पर रखा गया था, जबकि पूरे नेटवर्क का संचालन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अमेरिकी नागरिकों को फोन कर खुद को एप्पल कस्टमर सर्विस या संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। इसके बाद मोबाइल में वायरस या किसी गंभीर तकनीकी खराबी का डर दिखाकर पीड़ितों को एक वर्चुअल टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता था।
आरोप है कि इसके बाद सॉफ्टवेयर और एप्पल फेसटाइम के जरिए पीड़ितों से संपर्क कर समस्या दूर करने का झांसा दिया जाता था। पुलिस का दावा है कि आरोपियों द्वारा फेडरल ट्रेड कमीशन के नाम का कथित फर्जी पत्र दिखाकर भी लोगों में डर पैदा किया जाता था। इसके बाद समस्या के समाधान के नाम पर पीड़ितों से 10 हजार से 20 हजार अमेरिकी डॉलर तक जमा करवाए जाते थे। रकम कथित तौर पर विदेशों में मौजूद बैंक खातों में मंगाई जाती थी। गिफ्ट कार्ड और वाउचर नंबरों के जरिए भी ठगी किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस नेटवर्क के मुख्य संचालक, विदेशी बैंक खातों और ठगी की कुल रकम का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है।
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