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अब आसमान से होगी संपत्तियों की निगरानी MCD ने उड़ाए ड्रोन

SHIDDHANT
22 Sept 2026 11:47 PM IST
अब आसमान से होगी संपत्तियों की निगरानी MCD ने उड़ाए ड्रोन
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Delhi दिल्ली। दिल्ली में संपत्ति कर निर्धारण की व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। निगम ने ड्रोन आधारित GIS और 3D डिजिटल ट्विन सर्वे का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। पहले चरण में रोहिणी जोन के रोहिणी एफ वार्ड और शाहदरा दक्षिण जोन के घरोली वार्ड में ड्रोन के जरिए संपत्तियों का सर्वे किया जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट में सामान्य ड्रोन मैपिंग के साथ LiDAR, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, जियो-टैगिंग तथा 3D डिजिटल मॉडलिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उद्देश्य दिल्ली की संपत्तियों का अधिक सटीक और एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है।
ड्रोन सर्वे के जरिए ऐसी संपत्तियों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिनका अभी तक संपत्ति कर के लिए आकलन नहीं हुआ है या जिनका आकलन वास्तविक स्थिति से कम किया गया है। इसके अलावा गलत और डुप्लीकेट रिकॉर्ड तथा निगम के मौजूदा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की गई अतिरिक्त मंजिलों या नए निर्माण की पहचान भी की जा सकेगी।
MCD के अनुसार GIS और 3D डेटा की मदद से किसी संपत्ति के वास्तविक बिल्ट-अप एरिया, मंजिलों की संख्या और उसके
इस्तेमाल
की श्रेणी का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करना संभव होगा। इससे संपत्ति मालिक की ओर से घोषित क्षेत्र और वास्तविक निर्मित क्षेत्र के बीच अंतर का पता लगाने में भी मदद मिल सकती है।
इस नई व्यवस्था का एक बड़ा उद्देश्य मैनुअल निरीक्षण पर निर्भरता कम करना है। डिजिटल डेटा उपलब्ध होने से अलग-अलग इलाकों में संपत्ति कर निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक एकरूप बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। डिजिटल सिस्टम के माध्यम से टैक्स संबंधी विसंगतियों की पहचान करने के साथ नोटिस जारी करने, बकाया राशि की निगरानी और वार्ड एवं जोन स्तर पर टैक्स वसूली की स्थिति पर नजर रखने के लिए डैशबोर्ड भी विकसित किए जा सकेंगे।
निगम का कहना है कि जियो-टैग्ड संपत्ति रिकॉर्ड उपलब्ध होने से नागरिकों को भी फायदा होगा। संपत्ति के रिकॉर्ड और टैक्स असेसमेंट में पारदर्शिता बढ़ने के साथ शिकायतों के निपटारे में तेजी आ सकती है। अधिकारियों और संपत्ति मालिकों के बीच गैरजरूरी प्रत्यक्ष संपर्क तथा बार-बार होने वाले मैनुअल निरीक्षण की जरूरत भी कम होने की उम्मीद है।
MCD ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ड्रोन सर्वे तकनीकी मैपिंग और सत्यापन की प्रक्रिया है। सर्वे से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल लागू नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संपत्ति कर निर्धारण एवं प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर भविष्य में इस तकनीक के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने पर निर्णय लिया जा सकता है।
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