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नकली कोर्ट ऑर्डर से कैदी की रिहाई, जेल DIG पर एक्शन

SHIDDHANT
7 Oct 2026 11:21 PM IST
नकली कोर्ट ऑर्डर से कैदी की रिहाई, जेल DIG पर एक्शन
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बेंगलुरु। कर्नाटक में फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश के आधार पर उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी को जेल से रिहा कराने के मामले में जेल विभाग के डीआईजी सोमशेखर को गिरफ्तार किया गया है। मामला वर्ष 2018 में शंकर अरमुगम नाम के कैदी की रिहाई से जुड़ा है, जिसे 2004 के एक अपहरण मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जांच में सामने आया है कि शंकर अरमुगम को जेल से बाहर निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट के नाम से एक फर्जी आदेश तैयार किया गया था। इसी कथित आदेश को असली मानकर जेल प्रशासन ने 2018 में शंकर को रिहा कर दिया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस फर्जी आदेश को तैयार करने में तत्कालीन सेकंड डिवीजन असिस्टेंट यानी SDA श्रीकांत एस. की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि श्रीकांत ने सुप्रीम कोर्ट का नकली आदेश तैयार किया और उसे जेल प्रशासन तक पहुंचाया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर उम्रकैद की सजा काट रहे शंकर अरमुगम को रिहाई मिल गई।
2004 के अपहरण मामले में मिली थी उम्रकैद
शंकर अरमुगम को वर्ष 2004 के अपहरण मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह जेल में अपनी सजा काट रहा था, लेकिन 2018 में सुप्रीम कोर्ट के कथित आदेश के आधार पर उसे रिहा कर दिया गया। बाद में इस आदेश की सत्यता को लेकर सवाल उठे। जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि जिस आदेश के आधार पर कैदी को छोड़ा गया था, वह असली सुप्रीम कोर्ट आदेश नहीं था।
जेल विभाग की भूमिका की भी जांच
मामले की जांच के दौरान जेल प्रशासन के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी क्रम में जेल विभाग के डीआईजी सोमशेखर की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
फिलहाल यह जांच का विषय है कि फर्जी आदेश जेल प्रशासन तक कैसे पहुंचा, उसकी सत्यता की जांच किस स्तर पर की गई और किन अधिकारियों ने कैदी की रिहाई की प्रक्रिया को मंजूरी दी।
जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या किसी आर्थिक लेन-देन या अन्य लाभ के बदले यह रिहाई कराई गई थी।
मामले में तत्कालीन SDA श्रीकांत एस. की भूमिका पहले ही सामने आ चुकी है। अब डीआईजी स्तर के अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
फिलहाल संबंधित अधिकारियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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