पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव, 24 जुलाई मतदान तय

Kavita2
6 July 2026 4:52 PM IST
पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव, 24 जुलाई मतदान तय
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West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल में तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग ने इन सीटों पर 24 जुलाई को मतदान कराने की घोषणा की है। इस फैसले के साथ ही राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मौजूदा राजनीतिक हालात में इन सीटों पर मुकाबला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ये तीनों राज्यसभा सीटें खाली होने का कारण टीएमसी के तीन पूर्व सांसदों का इस्तीफा है। पूर्व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने जून में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार के बाद पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन्होंने अपर हाउस और पार्टी दोनों से दूरी बना ली।

इन इस्तीफों के बाद राज्यसभा की ये सीटें रिक्त हो गई थीं, जिन पर अब उपचुनाव कराए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि राज्य में बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत भी है।

सूत्रों के अनुसार, मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी इन तीनों सीटों पर मजबूत दावेदार के रूप में उभर रही है। हालांकि, टीएमसी भी अपने संगठनात्मक ढांचे और विधानसभा में मौजूद संख्याबल के आधार पर इन सीटों पर पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगी। इस कारण मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।

राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया में विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। ऐसे में जिस दल के पास विधानसभा में बहुमत होता है, उसके उम्मीदवारों की जीत की संभावना अधिक होती है। वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के आधार पर दोनों प्रमुख दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।

बीजेपी खेमे का मानना है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और विपक्षी खेमे में असंतोष का लाभ उन्हें मिल सकता है। वहीं टीएमसी नेतृत्व इन उपचुनावों को संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक स्थिरता का प्रदर्शन मानकर आगे बढ़ रहा है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपचुनाव आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में भी भूमिका निभा सकता है। खासकर तब, जब राज्य में पहले से ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।

उपचुनाव की घोषणा के बाद दोनों दलों के भीतर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। उम्मीदवार चयन, रणनीति और मतदान गणित को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी दल ने अपने आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।

स्थानीय राजनीतिक माहौल में भी इस उपचुनाव को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।

राज्य में पहले से ही राजनीतिक तापमान ऊंचा बना हुआ है और ऐसे में यह उपचुनाव इसे और बढ़ा सकता है। आने वाले दिनों में प्रचार और रणनीति के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है।

इस पूरे घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां राज्यसभा की ये तीन सीटें केवल प्रतिनिधित्व का माध्यम नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन का मंच भी बन गई हैं।

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