पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल: वोटिंग के दौरान मतदाता की मौत पर विवाद, CEO ने बीमारी को बताया कारण

Kavita2
1 May 2026 12:08 PM IST
पश्चिम बंगाल: वोटिंग के दौरान मतदाता की मौत पर विवाद, CEO ने बीमारी को बताया कारण
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West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली वोटों की गिनती से पहले एक 82 वर्षीय मतदाता की मौत को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राज्य के चीफ इलेक्टोरल ऑफिस (CEO) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि बुजुर्ग की मौत पोलिंग बूथ पर गिरने के बाद हुई, लेकिन इसका कारण बीमारी और उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या थी, न कि किसी तरह की हिंसा या सेंट्रल फोर्स का हमला।

पश्चिम बंगाल में इस वर्ष दो चरणों में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिनमें कुल 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

CEO द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा गया कि हावड़ा के पेनरो इलाके के 82 वर्षीय पूमा चंद्र डोलुई 29 अप्रैल 2026 को अपने बेटे के साथ उदयनारायणपुर स्थित बूथ संख्या 245 पर वोट डालने गए थे। उनके बेटे को EVM तक मदद करने के लिए बूथ के अंदर जाने की अनुमति दी गई थी।

बयान के अनुसार, मतदान प्रक्रिया पूरी करने के बाद श्री डोलुई गर्मी से थकावट और उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्या के कारण अचानक मतदान कक्ष के पास गिर पड़े। उन्हें तुरंत अमता अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इलेक्शन कमीशन के जनरल ऑब्ज़र्वर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि घटना मतदान के बाद हुई थी और उस समय उनके बेटे की मौजूदगी बूथ के अंदर थी। जांच में यह भी पाया गया कि सेंट्रल फोर्स की ओर से किसी प्रकार की मारपीट या धक्का-मुक्की नहीं हुई थी।

CEO कार्यालय ने कहा कि बिना पुष्टि के इस घटना को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाना गलत है और इससे मृतक की गरिमा और उनके परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। बयान में लोगों से अपील की गई कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों पर अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी से बचें।

यह स्पष्टीकरण तब आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि मतदान के दौरान केंद्रीय बलों की कथित कार्रवाई के कारण बुजुर्ग की मौत हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया था कि केंद्रीय बल वोटरों को डराने का काम कर रहे हैं और उन्होंने BJP पर गंभीर आरोप लगाए थे।

West Bengal में इस घटना ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है, जबकि चुनाव आयोग ने मामले में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करते हुए किसी भी तरह की हिंसा से इनकार किया है।

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