पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल: भाजपा सांसद सौंमित्र खाँ ने ममता बनर्जी के बयान पर जताई चिंता

SHIDDHANT
27 Nov 2025 9:17 PM IST
पश्चिम बंगाल: भाजपा सांसद सौंमित्र खाँ ने ममता बनर्जी के बयान पर जताई चिंता
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Bangal बंगाल: भाजपा सांसद सौंमित्र खाँ ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयान पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दी गई बातें लोगों में यह गलत धारणा पैदा कर रही हैं कि किसी के बीमार पड़ने या मृत्यु होने पर रोजगार लाभ या मुआवजा स्वचालित रूप से मिल जाता है। खाँ ने इसे “खतरनाक मानसिकता” बताया और चेताया कि इससे सामाजिक और प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सौंमित्र खाँ ने दुर्गापुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "ममता बनर्जी ने स्वयं कहा है कि यदि कोई बीमार पड़ता है या मर जाता है, तो मुआवजा या लाभ प्रदान किया जाएगा। इस बयान को लेकर आम लोग सोचने लगे हैं कि किसी की मौत होने पर तुरंत रोजगार लाभ मिल जाएगा। यह सोच न केवल भ्रम फैलाती है, बल्कि लोगों में जिम्मेदारी और समझ के स्तर को भी प्रभावित करती है।"
सांसद ने आगे कहा कि इस तरह की घोषणाओं से न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है, बल्कि आम जनता के बीच गलत अपेक्षाएं भी बढ़ती हैं। उन्होंने चेताया कि लोगों को सरकारी नियम और प्रक्रियाओं के सही तरीके से पालन करने की आवश्यकता है। भाजपा सांसद ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और जनता को सही जानकारी प्रदान करे, ताकि कोई भी गलतफहमी पैदा न हो। उन्होंने कहा कि मृत्यु या गंभीर बीमारी की स्थिति में मुआवजा या लाभ केवल नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही दिया जा सकता है।
सौंमित्र खाँ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, "नेताओं की कही गई बातें जनता के बीच भ्रम फैलाने का कारण बनती हैं। अगर किसी को सही जानकारी नहीं मिलती, तो लोग अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में गलत धारणा बना लेते हैं। यह प्रशासन के लिए भी चुनौती बन जाती है।"
सांसद ने यह भी कहा कि रोजगार लाभ और मुआवजा जैसी योजनाओं का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है। लेकिन अगर इसे गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया, तो इससे न केवल सिस्टम पर दबाव बढ़ता है, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक मदद भी सही समय पर नहीं पहुंच पाती। भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने बयान पर पुनर्विचार करना चाहिए और जनता को नियमों के सही ढंग से पालन करने की सलाह देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोग सही प्रक्रिया समझ लें, तो न केवल प्रशासनिक समस्याएं कम होंगी, बल्कि समाज में भी स्थिरता और संतुलन बनेगा।
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