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कोलकाता पुलिस के दो DCP सस्पेंड, सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट को लेकर हुई कार्रवाई

कोलकाता : कोलकाता पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। सोशल मीडिया पर कथित रूप से विवादित कंटेंट पोस्ट करने के मामले में पुलिस विभाग ने दो डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) को निलंबित कर दिया है। शुक्रवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।
निलंबित किए गए अधिकारियों में DCP III नॉर्थ डिवीजन बिधान साहा और DCP पोर्ट डिवीजन II पार्थ प्रतिम दास शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, दोनों के खिलाफ विभागीय स्तर पर जांच और समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई है।
इंटरनल रिव्यू में सामने आया मामला
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की आंतरिक समीक्षा (इंटरनल रिव्यू) की गई थी। इस दौरान सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्हें विभागीय नियमों का उल्लंघन माना गया।
हालांकि, पुलिस की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोनों अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर किस तरह का कंटेंट पोस्ट किया था और उसमें किस प्रकार के नियमों का उल्लंघन पाया गया। विभागीय जांच के बाद ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने आने की संभावना है।
वरिष्ठ पद पर तैनात थे दोनों अधिकारी
बिधान साहा और पार्थ प्रतिम दास दोनों कोलकाता पुलिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर तैनात थे। DCP स्तर के अधिकारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई को पुलिस विभाग में गंभीर कदम माना जा रहा है।
पुलिस विभाग में तैनात अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर कई दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं। अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी तरह की ऐसी सामग्री साझा न करें, जिससे विभाग की छवि प्रभावित हो या विवाद की स्थिति पैदा हो।
पुलिस विभाग ने लिया सख्त रुख
इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि कोलकाता पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर अपने अधिकारियों की जिम्मेदारी और आचरण को गंभीरता से ले रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुलिस सेवा में रहते हुए अधिकारियों को आचार संहिता और निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होता है। किसी भी अधिकारी की सोशल मीडिया गतिविधि यदि विभागीय मर्यादा के खिलाफ पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के बाद आगे की कार्रवाई संभव
फिलहाल दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनके खिलाफ आगे की विभागीय प्रक्रिया जारी रह सकती है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप गंभीर पाए जाते हैं तो विभागीय नियमों के अनुसार अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।
सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर बढ़ती सतर्कता
पिछले कुछ वर्षों में सरकारी अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी है। अधिकारियों द्वारा किए गए पोस्ट, टिप्पणियां और ऑनलाइन गतिविधियां कई बार विवाद का कारण बन जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों को सोशल मीडिया का उपयोग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनकी व्यक्तिगत गतिविधियों का असर संस्थान की छवि पर भी पड़ सकता है।
विभागीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर
पुलिस विभाग लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि अधिकारी अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारियों के अनुरूप व्यवहार करें। सोशल मीडिया के दौर में किसी भी पोस्ट या टिप्पणी का प्रभाव तेजी से व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है।
कोलकाता पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई इसी दिशा में एक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। विभाग का उद्देश्य अधिकारियों के बीच अनुशासन बनाए रखना और पुलिस की सार्वजनिक छवि को मजबूत रखना है।
फिलहाल दोनों DCP के निलंबन के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ अंतिम रूप से क्या कार्रवाई की जाएगी।





