पश्चिम बंगाल

TMC में अंदरूनी विवाद तेज, सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए

Kavita2
28 May 2026 12:50 PM IST
TMC में अंदरूनी विवाद तेज, सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कल्याण बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए
x

West Bengal वेस्ट बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर आंतरिक मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। पार्टी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अपने ही साथी और वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी पर संसद के अंदर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और महिला सांसदों के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर पार्टी के भीतर तनाव की स्थिति बनी हुई है।

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति मांगी है।

काकोली घोष दस्तीदार ने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने लोकसभा के भीतर कई बार इस तरह के व्यवहार का सामना किया है, जिसमें उन्हें कथित तौर पर गालियां दी गईं और अपमानित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवहार केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि अन्य महिला कार्यकर्ताओं के साथ भी देखा गया है।

सांसद ने अपने पत्र में कहा कि यह रवैया महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता और अपमान को दर्शाता है, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे व्यवहार पर रोक लगाना जरूरी है ताकि संसद की गरिमा बनी रहे।

कल्याण बनर्जी पर लगाए गए आरोपों को लेकर पार्टी के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस विवाद ने TMC के अंदरूनी मतभेदों को उजागर कर दिया है।

कल्याण बनर्जी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक माने जाते हैं और संसद में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। लेकिन इन आरोपों के बाद पार्टी के भीतर उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

लोकसभा में हुई इस कथित घटना को लेकर स्पीकर ओम बिरला से शिकायत दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है, जिससे मामला प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया में जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, TMC के भीतर पहले से ही कुछ मुद्दों को लेकर असहमति चल रही थी और यह नया विवाद पार्टी के अंदरूनी तनाव को और बढ़ा सकता है। महिला सांसदों के प्रति व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है और सभी की नजर लोकसभा स्पीकर के निर्णय पर टिकी है कि क्या इस मामले में औपचारिक जांच आगे बढ़ेगी या नहीं।

यह विवाद संसद के भीतर आचरण और मर्यादा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ रहा है और आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

Next Story