पश्चिम बंगाल

TMC में गहराया आंतरिक संकट, चुनावी हार के बाद बढ़ी असंतोष की लहर

Kavita2
9 Jun 2026 3:42 PM IST
TMC में गहराया आंतरिक संकट, चुनावी हार के बाद बढ़ी असंतोष की लहर
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West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद आंतरिक दरार लगातार गहरी होती जा रही है। पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे संगठन में अस्थिरता की स्थिति देखी जा रही है।

मंगलवार को एक और घटनाक्रम में टीएमसी के कुछ “असंतुष्ट” सांसदों के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल होने की खबर सामने आई। इनमें सांसद जून माल्या और दीपक अधिकारी (देव) के नाम शामिल हैं, जिनके इस कदम ने पार्टी के भीतर हलचल और बढ़ा दी है। इस बैठक में उनकी भागीदारी को लेकर टीएमसी के अंदर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर पहले से चल रहे असंतोष को और अधिक उजागर करता है। कहा जा रहा है कि कई सांसद और विधायक नेतृत्व से नाखुश हैं और संगठनात्मक फैसलों को लेकर असहमति जता रहे हैं। इससे पार्टी के अंदर गुटबाजी की स्थिति मजबूत होती दिख रही है।

यह पूरा घटनाक्रम उस समय और गंभीर हो गया जब इससे एक दिन पहले संसद में टीएमसी के भीतर विद्रोह जैसी स्थिति सामने आई थी। वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 लोकसभा सांसदों ने कथित तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की बात कही थी। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखने का दावा भी किया था, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।

इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव और बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे असंतोष के संकेत टीएमसी की संगठनात्मक मजबूती के लिए चुनौती बन सकते हैं।

हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिशें जारी हैं। नेताओं के बीच संवाद और सुलह की कोशिशें भी तेज हो गई हैं, ताकि स्थिति और न बिगड़े।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में टीएमसी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक संकट गहरा सकता है। पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रखना और आंतरिक मतभेदों को दूर करना है।

फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और सभी की नजरें टीएमसी के अगले कदम पर टिकी हैं।

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