पश्चिम बंगाल

टीएमसी के आरोप बेबुनियाद: बीजेपी नेता राहुल सिन्हा बोले

SHIDDHANT
30 Oct 2025 9:35 PM IST
टीएमसी के आरोप बेबुनियाद: बीजेपी नेता राहुल सिन्हा बोले
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Kolkata कोलकाता। राज्य में चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है, और इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच वोटर लिस्ट विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। टीएमसी द्वारा चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और कई बूथों की सूची ‘गुम’ होने के आरोपों के बाद बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने तीखा पलटवार किया है। राहुल सिन्हा ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “टीएमसी द्वारा दिखाए जा रहे सभी वोटर लिस्ट झूठे और मनगढ़ंत हैं। वे लोगों को भ्रमित करने के लिए फर्जी दस्तावेज़ सामने रख रहे हैं। सच यह है कि चुनाव आयोग ने पारदर्शिता बनाए रखते हुए पूरी प्रक्रिया की निगरानी की है, और किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह करना चाहती है। “टीएमसी यह समझ चुकी है कि जनता अब उनकी नीतियों से ऊब चुकी है, इसलिए वे पहले से ही बहाने ढूंढ रही हैं कि चुनाव परिणाम आने के बाद हार का ठीकरा आयोग पर फोड़ सकें,” सिन्हा ने कहा। बीजेपी नेता ने आगे कहा कि यदि टीएमसी के पास वास्तव में कोई ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करें या फिर चुनाव आयोग को सौंपें। “सिर्फ आरोप लगाने से सच नहीं बदलता। चुनाव आयोग संविधान के तहत स्वतंत्र रूप से काम करता है, और हर मतदाता सूची को कई बार जांचा-परखा गया है,” उन्होंने जोड़ा।
गौरतलब है कि टीएमसी नेताओं ने दावा किया था कि कई विधानसभा क्षेत्रों में 2002 के मतदाता सूची की सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी में बड़ा अंतर पाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बूथों में मतदाताओं के नाम पूरी तरह गायब हैं, जिससे चुनाव में धांधली की आशंका बढ़ जाती है। इस पर राहुल सिन्हा ने कहा कि यह सब राजनीतिक नाटक है। “टीएमसी के लिए अब यह आम बात हो गई है कि वे जब भी घबराते हैं, तो संस्थाओं पर आरोप लगाते हैं। लेकिन बंगाल की जनता अब सच्चाई जान चुकी है,” उन्होंने कहा।
इस विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि किसी भी बूथ की मतदाता सूची में गड़बड़ी पाई जाने पर तुरंत जांच की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का यह विवाद आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान और बढ़ा सकता है।
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