- Home
- /
- राज्य
- /
- पश्चिम बंगाल
- /
- TMC विवाद: गुट की ईसी...

पश्चिम बंगाल: राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा आंतरिक विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। पार्टी में विभाजन और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की पूर्ण पीठ से मुलाकात करेगा। इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है, क्योंकि यह मामला अब पार्टी के नाम, कोष और चुनाव चिह्न ‘दो फूल’ के अधिकार तक पहुंच गया है।
रीतब्रत बनर्जी गुट की ओर से 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखेगा। जानकारी के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से मुलाकात करेगा। हालांकि, गुट के नेताओं ने अभी तक बैठक के विस्तृत एजेंडा का खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें पार्टी की वैधता और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर बड़ा दावा पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट यह तर्क दे सकता है कि वही असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है और उसे पार्टी की संगठनात्मक और विधायी इकाई के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। गुट का दावा है कि उनके साथ पार्टी के अधिकतर पदाधिकारी और कई निर्वाचित जनप्रतिनिधि जुड़े हुए हैं, इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उनका अधिकार बनता है।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब इससे पहले रीतब्रत बनर्जी गुट के नेताओं ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। उस दौरान पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर शुरुआती स्तर पर अपना पक्ष रखा गया था। अब मामला सीधे चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ तक पहुंच चुका है, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद केवल संगठनात्मक मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह पार्टी की राजनीतिक पहचान और अस्तित्व की लड़ाई बनता जा रहा है। बागी गुट का दावा है कि बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी को मिली कथित हार के बाद संगठन में असंतोष गहराया, जिसके चलते विधायकों और नेताओं के एक बड़े धड़े ने अलग रुख अपनाया। गुट के नेताओं का कहना है कि मौजूदा हालात में टीएमसी के भीतर दो अलग-अलग राजनीतिक धड़े सक्रिय हैं, जो पार्टी के संगठन, विधायी इकाई और नेतृत्व पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इसी कारण अब दोनों पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस साबित करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनाव आयोग इस मामले में कोई बड़ा निर्णय लेता है, तो इसका असर न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि देश की क्षेत्रीय राजनीति में भी इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें बृहस्पतिवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हुई हैं, जहां रीतब्रत बनर्जी गुट अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में है। यह मुलाकात टीएमसी के भीतर चल रहे विवाद को एक नया मोड़ दे सकती है और आने वाले समय में पार्टी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।





