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Bangal बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सायनी घोष ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह एक बिल्कुल ही बेहया और पक्षपाती संस्था बन चुकी है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के हित में काम कर रहा है और वह अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा नहीं रहा है। सायनी घोष ने कहा, "यह एक बिल्कुल ही शर्मनाक चुनाव आयोग है, जो एक राजनीतिक पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी तथा तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल के लोगों के अधिकारों और भारत के नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। यह उनका लोकतांत्रिक कर्तव्य है, जिसे वे अपने चुने हुए प्रतिनिधि होने के नाते निभा रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग के सामने उठाए गए सवालों का जवाब देना आयोग की जिम्मेदारी है। "चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह किन आधारों पर अपने निर्णय ले रहा है और क्या वह सभी राजनीतिक दलों के प्रति निष्पक्ष है या नहीं। लोकतंत्र में सभी पार्टियों और नागरिकों के साथ समान व्यवहार होना अनिवार्य है," उन्होंने जोड़ा। TMC सांसद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की यह स्थिति पश्चिम बंगाल की जनता और पूरे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लगातार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जो कई बार विपक्षी दलों और उनके कार्यकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित कर रहे हैं।
सांसद सायनी घोष ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी केवल अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। "हम लोग किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि जनता के हित के लिए काम कर रहे हैं। हमारे पास पश्चिम बंगाल और पूरे देश के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने का नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने भी आयोग की कार्रवाइयों पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की मांग की है।
विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव आयोग की छवि पर यह आरोप गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। यदि आयोग पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप सही पाए गए, तो यह न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे देश में चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। TMC के इस बयान ने देश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस को जोरदार तरीके से शुरू कर दिया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों का जवाब कैसे देता है और भविष्य में इसकी कार्यप्रणाली में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।
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