पश्चिम बंगाल

TMC विधायक मदन मित्रा का बड़ा फैसला, सभी जिम्मेदारियों से हुए अलग

Ratna Netam
15 July 2026 5:10 PM IST
TMC  विधायक मदन मित्रा का बड़ा फैसला, सभी जिम्मेदारियों से हुए अलग
x

Kolkata कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और उत्तर 24 परगना जिले के कामारहाटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक मदन मित्रा ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

मदन मित्रा बुधवार सुबह अपने आवास से खुद कार चलाकर पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे। विधानसभा पहुंचने के बाद उन्होंने विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के कक्ष में जाकर मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अपने फैसले की जानकारी दी।

मदन मित्रा ने भावुक होते हुए कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें सही और गलत के बीच फैसला लेना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अभी भी तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं और बंगाल की जनता के प्रतिनिधि हैं, लेकिन पार्टी में उन्हें जो भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिली थीं, उन सभी पदों से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में रहते हुए लंबे समय तक काम किया है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति उनके मन में हमेशा सम्मान रहेगा। मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं, लेकिन अब उन्होंने संगठनात्मक पदों से अलग होने का निर्णय लिया है।

मदन मित्रा ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय समिति के चीफ व्हिप, वर्किंग कमेटी और पार्टी के महासचिव सहित सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वह अभी भी तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं और विधानसभा में जनता की आवाज उठाते रहेंगे।

अपने बयान में मदन मित्रा ने पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना भी साधा। उन्होंने कहा कि जब भविष्य में बंगाल की राजनीति का इतिहास लिखा जाएगा तो यह भी दर्ज होगा कि एक व्यक्ति की वजह से 213 सीटें जीतने वाली पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि उन्होंने उस व्यक्ति का नाम नहीं लिया।

आगामी 21 जुलाई को होने वाले तृणमूल कांग्रेस के शहीद दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह पहले भी तृणमूल में थे और अब भी तृणमूल में हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल "एक कमरे से दूसरे कमरे" में जाने का फैसला किया है। उनके अनुसार, पहले जहां उन्हें आराम महसूस होता था, अब उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना है।

मदन मित्रा के इस कदम को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक अहम राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। वह पार्टी के पुराने नेताओं में शामिल रहे हैं और राज्य की राजनीति में उनकी अलग पहचान है। उनके इस्तीफे के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और इसका बंगाल की सियासत पर कितना असर पड़ता है।

Next Story