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पश्चिम बंगाल
चोरबागान भगदड़ मामले में पुलिस पर भड़के TMC नेता कुणाल घोष
Ratna Netam
19 Oct 2026 3:40 PM IST

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ममता बनर्जी गुट के तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता कुणाल घोष सोमवार, 19 अक्टूबर को महाष्टमी के अवसर पर नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन पहुंचे। विपक्ष की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के बाद पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी किया था। घोष ने कहा कि वह कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं और पुलिस के नोटिस को नजरअंदाज नहीं करना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने चोरबागान भगदड़ मामले में पुलिस की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए।कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि इतने बड़े हादसे में वरिष्ठ अधिकारियों और आयोजन की निगरानी करने वालों की जिम्मेदारी की पर्याप्त जांच किए बिना निचले स्तर के कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि आखिर होमगार्ड और स्थानीय सिविक वॉलंटियर्स को ही प्रशासनिक विफलताओं के लिए जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है।
महाष्टमी पर पुलिस स्टेशन पहुंचे कुणाल घोष
कुणाल घोष ने बताया कि विपक्ष से जुड़े एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद उन्हें पुलिस की ओर से नोटिस भेजा गया।उन्होंने कहा कि महाष्टमी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर पर भी उन्होंने कानून का सम्मान करते हुए पुलिस स्टेशन पहुंचना उचित समझा।घोष का कहना था कि वह जांच प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन कानून और जांच प्रक्रिया का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।भाजपा की शिकायत के बाद कुणाल घोष को सोमवार दोपहर नारकेलडांगा थाने में तलब किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
चोरबागान भगदड़ में 19 लोगों की मौत
उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 25 लोग घायल हुए। इस घटना ने दुर्गा पूजा आयोजनों के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्रारंभिक जांच और स्थानीय लोगों के बयानों के अनुसार, भारी बारिश के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक साथ पंडाल की ओर बढ़ने से अफरातफरी मच गई थी। संकरी गलियां, सीमित निकास व्यवस्था और भीड़ को नियंत्रित करने के अपर्याप्त इंतजाम हादसे की गंभीरता बढ़ाने वाले कारणों में शामिल बताए गए हैं।
छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल
कुणाल घोष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना केवल होमगार्ड या सिविक वॉलंटियर्स की जिम्मेदारी नहीं होती।उनका कहना था कि भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा योजना और आपातकालीन व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों तथा संबंधित आयोजन समिति की भी होती है।उन्होंने सवाल किया कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं, तो उनकी जवाबदेही उच्च स्तर पर क्यों नहीं तय की जा रही है। घोष ने मांग की कि जांच में सभी जिम्मेदार पक्षों की भूमिका निष्पक्ष तरीके से परखी जाए।
पुलिस आयुक्त की भूमिका पर भी उठाए सवाल
चोरबागान हादसे के बाद कुणाल घोष ने कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद की भूमिका पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस भीड़ प्रबंधन की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही।घोष ने पुलिस आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा था कि हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, ये उनके आरोप और राजनीतिक मांगें हैं। किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
भगदड़ मामले में सात आरोपी गिरफ्तार
चोरबागान भगदड़ मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पूजा समिति के पदाधिकारी, पंडाल निर्माण से जुड़े कर्मचारी और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले लोग शामिल हैं।पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार सातों आरोपियों को अदालत ने दस दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। जांच में आयोजन की अनुमति, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
हादसे के बाद राजनीतिक विवाद तेज
चोरबागान की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक जवाबदेही और पूजा आयोजनों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।कुणाल घोष ने मांग की है कि जांच केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वहीं पुलिस की जांच प्रक्रिया में पूजा समिति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।अब इस मामले में पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। घटना ने बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षित प्रवेश, निकास और प्रभावी भीड़ प्रबंधन की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है।
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