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Kolkata. कोलकाता।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इतिहास से जुड़ी टिप्पणी पर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास को जानना बेहद जरूरी है और तृणमूल कांग्रेस भी इसका समर्थन करती है। हालांकि उन्होंने कहा कि भारत के अतीत के किसी हिस्से को भुलाने की बात उचित नहीं होगी। रिजु दत्ता ने कहा कि भारत का इतिहास काफी विस्तृत है और इसमें अलग-अलग कालखंड, राजवंश और शासन शामिल रहे हैं। उन्होंने अमित शाह की टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर देश के अतीत, जिसमें करीब 200 वर्षों का ब्रिटिश शासन भी शामिल है, उसे भूलने की बात कही जाती है तो यह गलत होगा।
टीएमसी प्रवक्ता ने मुगल शासन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुगलों ने भी लंबे समय तक भारत के विभिन्न हिस्सों पर शासन किया और इस कालखंड को भी इतिहास से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि अगर इतिहास के किसी एक दौर को भुलाने की बात होगी तो क्या मुगल काल को भी भूल जाना चाहिए? रिजु दत्ता ने कहा कि जिस तरह मराठाओं, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और चोल शासकों के बारे में जानना महत्वपूर्ण है, उसी तरह ब्रिटिश और मुगल शासन से जुड़े इतिहास को जानना भी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के इतिहास को उसकी संपूर्णता में समझा जाना चाहिए।
उनके मुताबिक इतिहास केवल गौरवशाली उपलब्धियों तक सीमित नहीं होता, बल्कि अलग-अलग समय में हुई घटनाओं और शासन व्यवस्थाओं की जानकारी भी उसका हिस्सा होती है। आने वाली पीढ़ियों को देश के विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। रिजु दत्ता की प्रतिक्रिया के बाद इतिहास को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है। भारतीय इतिहास की व्याख्या और विभिन्न कालखंडों को दिए जाने वाले महत्व को लेकर राजनीतिक दलों के बीच पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं।
टीएमसी प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी देश के इतिहास को जानने की आवश्यकता से सहमत है। उनका विरोध इतिहास के किसी विशेष हिस्से को भूलने या उससे अलग होने की धारणा को लेकर है। उन्होंने कहा कि मराठा इतिहास, चोल राजवंश और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे व्यक्तित्वों के योगदान को जानने के साथ ब्रिटिश शासन और मुगल काल का अध्ययन भी भारत के इतिहास को समझने के लिए जरूरी है। फिलहाल रिजु दत्ता के बयान ने इतिहास को लेकर जारी राजनीतिक बहस में एक नया पक्ष जोड़ दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के अतीत के सभी प्रमुख कालखंडों को इतिहास के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
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