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पश्चिम बंगाल
टीएमसी ने हिंसक बयान से किया किनारा, मंत्री शशि पंजा बोलीं
SHIDDHANT
27 Oct 2025 8:22 PM IST

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Kolkata कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद सियासत तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के एक नेता के “अगर मतदाताओं के नाम हटाए गए तो राज्य में खूनी संघर्ष होगा” वाले बयान पर अब राज्य सरकार की मंत्री और वरिष्ठ टीएमसी नेता डॉ. शशि पंजा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पार्टी की ओर से स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करती और वह संविधान एवं कानून के दायरे में रहकर हर लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेगी। मंत्री शशि पंजा ने मीडिया से कहा, “पार्टी की ओर से मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि हमारे जिला और ब्लॉक स्तर के नेता हिंसा के रास्ते पर नहीं चलेंगे। पार्टी नेतृत्व ने सभी को निर्देश दिया है कि ऐसे भड़काऊ बयान देने से बचें। तृणमूल कांग्रेस कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखेगी।
उन्होंने आगे कहा कि यदि किसी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है या उसके मतदान के अधिकार पर आघात होता है, तो टीएमसी इसका विरोध जरूर करेगी, लेकिन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से। उन्होंने कहा, “हमें अपने राज्य और लोकतंत्र की मर्यादा का ध्यान रखना होगा। हिंसा का रास्ता हमारा रास्ता नहीं है। इससे पहले टीएमसी के एक स्थानीय नेता का बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कहा था कि अगर वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए तो “राज्य में खून बह जाएगा।” विपक्षी दलों ने इस बयान को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि टीएमसी राज्य में डर और अराजकता का माहौल बना रही है। इस विवाद के बाद पार्टी नेतृत्व ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की और सभी जिलों में संगठन पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे सार्वजनिक मंचों पर संयमित भाषा का प्रयोग करें।
शशि पंजा ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा जनता के अधिकारों की रक्षा की है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी को पूरी उम्मीद है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाएगा। अगर किसी को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो वह विधिक रास्ता अपनाए, न कि हिंसा का। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले राज्य में मतदाता सूची का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। टीएमसी जहां इस मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे हिंसात्मक राजनीति का संकेत बता रहा है। फिलहाल टीएमसी नेतृत्व का रुख साफ है कि पार्टी अब किसी भी तरह की बयानबाजी से दूरी बनाए रखेगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई करेगी।
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