पश्चिम बंगाल

वंदे मातरम् विवाद में आमने सामने TMC और BJP

Ratna Netam
28 Aug 2026 4:27 PM IST
वंदे मातरम् विवाद में आमने सामने TMC और BJP
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पश्चिम बंगाल : राजनीति में राष्ट्रगीत **‘वंदे मातरम्’** को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को दो बड़े चैलेंज दिए हैं। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी से न सिर्फ भबानीपुर वोट काउंटिंग बूथ की CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की, बल्कि उन्हें अकेले **‘वंदे मातरम्’ के चार अंतरे गाकर दिखाने** की चुनौती भी दे दी।
कलकत्ता में आयोजित तृणमूल छात्र परिषद के कार्यक्रम के दौरान कल्याण बनर्जी ने यह बयान दिया। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वह राष्ट्रगीत को लेकर इतने गंभीर हैं तो उन्हें इसके सभी अंतरों को बिना किसी मदद के गाकर दिखाना चाहिए।
कैसे शुरू हुआ ‘वंदे मातरम्’ विवाद?
दरअसल, पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ समय से ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि राज्य में रहने वाले लोगों को ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान करना चाहिए।
इसके बाद विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। TMC नेताओं का कहना है कि राष्ट्रगीत का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसे राजनीतिक हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
TMC ने क्यों दिया चार अंतरे गाने का चैलेंज?
कल्याण बनर्जी का कहना है कि बीजेपी और शुभेंदु अधिकारी बार-बार ‘वंदे मातरम्’ और देशभक्ति की बात करते हैं। ऐसे में उन्हें खुद साबित करना चाहिए कि वह इस गीत के बारे में कितनी जानकारी रखते हैं।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि शुभेंदु अधिकारी बिना टेलीप्रॉम्प्टर या किसी सहायता के ‘वंदे मातरम्’ के चार अंतरे गाकर दिखाएं। साथ ही उन्होंने भबानीपुर वोट काउंटिंग से जुड़े CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की भी मांग रखी।
शुभेंदु अधिकारी का क्या रुख है?
शुभेंदु अधिकारी लंबे समय से राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने पहले भी कहा है कि पश्चिम बंगाल में देशभक्ति से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
उनका कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी भावनाओं और देश की पहचान का प्रतीक है।
वंदे मातरम्’ के अंतरों पर क्यों होती है बहस?
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा था। इसके शुरुआती दो अंतरों को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता मिली है।
हालांकि, पूरे गीत के अन्य अंतरों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। कुछ लोग पूरे गीत के इस्तेमाल की मांग करते हैं, जबकि कुछ लोग केवल मान्य हिस्से के उपयोग की बात करते हैं।
बीजेपी और TMC आमने-सामने
पश्चिम बंगाल में बीजेपी और TMC के बीच राजनीतिक टकराव पहले से ही काफी तेज है। ऐसे में ‘वंदे मातरम्’ जैसे भावनात्मक मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
बीजेपी जहां इसे राष्ट्र गौरव और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ रही है, वहीं TMC इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
कल्याण बनर्जी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग TMC के चैलेंज को राजनीतिक हमला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे बीजेपी के राष्ट्रवाद वाले रुख का जवाब मान रहे हैं।
कई यूजर्स का कहना है कि देशभक्ति का मूल्यांकन केवल किसी गीत को गाने से नहीं किया जा सकता, जबकि अन्य लोग इसे नेताओं की जिम्मेदारी से जोड़कर देख रहे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बंगाल की राजनीति में बयानबाजी जारी है। शुभेंदु अधिकारी की ओर से इस चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
यह विवाद केवल एक गीत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बंगाल की राजनीति में राष्ट्रवाद, संस्कृति और पहचान की बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है।
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