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वीटीआर से बक्सा टाइगर रिजर्व भेजी जाएगी बाघिन, बाघों की संख्या बढ़ाने की तैयारी तेज

अलीपुरद्वार। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी योजना के तहत वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से एक बाघिन को बक्सा टाइगर रिजर्व में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बाघिन के स्थानांतरण और पुनर्वास की प्रक्रिया की निगरानी के लिए पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व और सुंदरवन से जुड़े करीब 20 विशेषज्ञों की टीम पहुंची है।
2 अक्टूबर तक बाघिन को बसाने का लक्ष्य
जानकारी के अनुसार, अधिकारियों ने बाघिन को बक्सा टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने का लक्ष्य 2 अक्टूबर रखा है।
इससे पहले विशेषज्ञों की टीम बाघिन की गतिविधियों, व्यवहार और आहार संबंधी आदतों का अध्ययन करेगी। टीम करीब तीन दिनों तक जंगल क्षेत्र में रहकर बाघिन की निगरानी करेगी।
मंगुराहा जंगल क्षेत्र में निगरानी शुरू
विशेषज्ञों की टीम ने मंगुराहा के जंगल क्षेत्र में बाघिन की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया है।
टीम उन इलाकों को चिह्नित कर रही है, जहां बाघिन के आने-जाने की संभावना अधिक है। इसके लिए जंगल के विभिन्न हिस्सों की निगरानी की जा रही है।
विशेषज्ञ बाघिन के व्यवहार, चलने के रास्तों और उसके प्राकृतिक माहौल से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं।
अभी शुरू नहीं हुई रेस्क्यू प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल बाघिन के रेस्क्यू की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
विशेषज्ञों की टीम पहले सभी जरूरी तैयारियों और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है। अधिकारियों से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और नए वातावरण में बसाने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं।
बक्सा टाइगर रिजर्व में बढ़ेगा बाघों का कुनबा
बक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं।
बाघ पुनर्वास कार्यक्रम का उद्देश्य बाघों के प्राकृतिक आवास को मजबूत करना और उनकी संख्या में वृद्धि करना है।
वीटीआर से बाघिन का स्थानांतरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों की टीम कर रही है अध्ययन
बाघ जैसे वन्यजीवों के स्थानांतरण के दौरान उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और नए वातावरण में अनुकूलन क्षमता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
विशेषज्ञ टीम बाघिन के स्वास्थ्य और गतिविधियों का लगातार आकलन कर रही है।
इसके अलावा बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघिन के लिए उपयुक्त वातावरण, भोजन और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण पहल
बाघ संरक्षण भारत में वन्यजीव संरक्षण की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। बाघों के लिए सुरक्षित आवास और बेहतर प्रबंधन उनकी संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत अलग-अलग टाइगर रिजर्व के बीच बाघों का स्थानांतरण किया जाता है, ताकि उनकी आबादी को संतुलित किया जा सके।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
फिलहाल विशेषज्ञ टीम बाघिन की निगरानी और स्थानांतरण की तैयारियों में जुटी हुई है।
रेस्क्यू और स्थानांतरण की अंतिम प्रक्रिया अधिकारियों के निर्देश के बाद शुरू की जाएगी।
यदि योजना सफल रहती है तो बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।





