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पश्चिम बंगाल
पेंशन बढ़ोतरी की कहानी वादा कुछ और फैसला कुछ और निकला
Ratna Netam
8 Sept 2026 4:49 PM IST

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पेंशन बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। सरकार की ओर से पेंशन राशि में बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी विपक्ष और लाभार्थियों के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि जिस तरह पेंशन को दोगुना करने का वादा किया गया था, उसके मुकाबले मौजूदा बढ़ोतरी काफी कम है। वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरकार की सीमाओं और आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी सफाई दी है। साथ ही उन्होंने भविष्य में और राहत देने का भरोसा भी दिलाया है।
दरअसल, पेंशन योजना से जुड़े लाखों लोगों को उम्मीद थी कि सरकार उनके लिए बड़ा ऐलान करेगी। चुनावी वादों और घोषणाओं के बीच कई बार पेंशन राशि बढ़ाने की बात सामने आई थी। लोगों को उम्मीद थी कि मौजूदा राशि में बड़ी बढ़ोतरी होगी और उन्हें महंगाई के दौर में आर्थिक सहारा मिलेगा। लेकिन जब नई राशि सामने आई तो कई लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं मिला।
दोगुनी पेंशन की उम्मीद, लेकिन बढ़ोतरी 50 प्रतिशत तक सीमित
लाभार्थियों का कहना है कि सरकार से उम्मीद थी कि पेंशन राशि दोगुनी की जाएगी। हालांकि वास्तविक बढ़ोतरी करीब 50 प्रतिशत तक ही पहुंची है। ऐसे में कई बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों ने सवाल उठाए हैं कि जब वादा बड़ा था तो राहत भी उसी स्तर की क्यों नहीं दी गई।
पेंशन पाने वाले लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई, दवाइयों के खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए मौजूदा राशि पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि उम्र बढ़ने के साथ आमदनी के साधन कम हो जाते हैं, ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन ही उनके लिए सबसे बड़ा सहारा होती है।
CM शुभेंदु ने बताई सरकार की मजबूरी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी योजना को लागू करने के लिए आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार की इच्छा ज्यादा राहत देने की है, लेकिन संसाधनों और बजट की सीमाओं के कारण हर फैसला तुरंत लागू करना आसान नहीं होता।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार लोगों के हित में काम कर रही है और आने वाले समय में जरूरत के अनुसार पेंशन राशि में और सुधार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी परेशानियों को समझती है और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
महंगाई के बीच बुजुर्गों की बढ़ी चिंता
पेंशन पर निर्भर लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में खाने-पीने की चीजों से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक की लागत बढ़ी है। ऐसे में पेंशन में होने वाली छोटी बढ़ोतरी से उनकी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं होतीं।
कई बुजुर्गों ने मांग की है कि सरकार को पेंशन राशि तय करते समय महंगाई दर और जीवन-यापन की वास्तविक लागत को ध्यान में रखना चाहिए। उनका कहना है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।
विपक्ष ने उठाए सवाल
पेंशन बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव के समय किए गए वादों और जमीन पर लागू योजनाओं के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। उनका आरोप है कि सरकार ने लोगों को बड़ी उम्मीदें दीं, लेकिन पूरा लाभ नहीं दिया गया।
वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पेंशन बढ़ाना एक सकारात्मक कदम है। उनका दावा है कि सीमित संसाधनों में भी सरकार आम लोगों को राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
आगे बढ़ सकती है पेंशन राशि?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भरोसे के बाद अब लाभार्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी और पेंशन राशि में और बढ़ोतरी कर सकती है।
फिलहाल पेंशन बढ़ोतरी का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ सरकार इसे राहत भरा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर लोग पुराने वादों को याद दिलाते हुए ज्यादा मदद की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मामले में कोई नया फैसला लेती है या नहीं।
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