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West Bengal चुनाव के दूसरे चरण में दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर निर्णायक मुकाबला

West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग बुधवार को होने जा रही है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। इस चरण में कुल 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जिनमें कोलकाता, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नादिया, हुगली और पूर्व बर्धमान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
यह चरण सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए उसकी मजबूत मानी जाने वाली दक्षिण बंगाल बेल्ट का असली परीक्षण माना जा रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए यह राज्य सचिवालय नबन्ना तक पहुंचने की राजनीतिक चुनौती का अंतिम मौका है।
पहले चरण के मतदान के बाद अब पूरा फोकस दक्षिण बंगाल पर केंद्रित हो गया है, जहां 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 123 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि BJP को केवल 18 सीटें और ISF को एक सीट मिली थी।
पांच साल पहले भी भारी राजनीतिक दबाव के बावजूद ममता बनर्जी की पार्टी ने दक्षिण बंगाल में मजबूत प्रदर्शन करते हुए सत्ता में अपनी स्थिति बनाए रखी थी। इसी कारण यह क्षेत्र TMC का पारंपरिक और सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है।
इस चरण का सबसे अहम और प्रतीकात्मक केंद्र भवानीपुर विधानसभा सीट है, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। यहां का मुकाबला राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसे BJP और TMC दोनों ही रणनीतिक दृष्टि से देख रहे हैं।
BJP के लिए यह चरण एंटी-इनकंबेंसी, भ्रष्टाचार के आरोपों और नागरिकता जैसे मुद्दों के आधार पर TMC की मजबूत पकड़ को चुनौती देने का अंतिम अवसर है। पार्टी का मानना है कि यदि इन मुद्दों का प्रभाव पड़ा तो परिणामों में बड़ा बदलाव संभव है।
वहीं TMC के लिए दक्षिण बंगाल की इन सीटों पर पकड़ बनाए रखना लगातार चौथे कार्यकाल की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह क्षेत्र हमेशा से उनका मजबूत आधार रहा है और पिछले विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों में भी जनता ने उनका समर्थन किया है।
एक वरिष्ठ TMC नेता ने कहा कि यदि दक्षिण बंगाल की यह बेल्ट पार्टी के साथ बनी रहती है, तो राज्य में ममता बनर्जी की सत्ता की स्थिति और मजबूत हो जाएगी।
इस तरह दूसरे चरण का मतदान केवल सीटों की संख्या तय करने का नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक सत्ता संतुलन और भविष्य की दिशा तय करने का निर्णायक मुकाबला बन गया है।





