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नॉर्थ बंगाल में चुनावी जंग तेज, 54 सीटों पर BJP-TMC आमने-सामने

West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नॉर्थ बंगाल एक बार फिर सबसे अहम चुनावी मैदानों में शामिल हो गया है। 54 विधानसभा सीटों वाले इस क्षेत्र में सत्तारूढ़ TMC और BJP के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां पहले चरण में 23 अप्रैल को सभी सीटों पर मतदान होना है।
BJP इस इलाके को अपना मजबूत आधार बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जिसने पिछले चुनावों में राज्य में उसकी स्थिति को मजबूत किया था। वहीं TMC बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है।
BJP ने 2019 लोकसभा चुनावों में नॉर्थ बंगाल में बेहतर प्रदर्शन किया था और 8 में से 7 सीटें जीती थीं। 2021 विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने 54 में से 30 सीटें जीतकर बढ़त बनाए रखी थी। 2024 लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने 6 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी बरकरार रखी, हालांकि पिछली तुलना में उसकी पकड़ कुछ कमजोर हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह क्षेत्र अब पहले जैसा एकतरफा नहीं रहा और यहां मुकाबला काफी करीबी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एंटी-इनकंबेंसी और स्थानीय असंतोष दोनों पार्टियों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
नॉर्थ बंगाल के आठ जिले—दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूच बिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा—में राजनीतिक समीकरण अलग-अलग हैं। पहाड़ी क्षेत्र, चाय बागान, राजबंशी बहुल इलाके और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र सभी अपनी अलग राजनीतिक पहचान रखते हैं।
BJP ने इस बार 54 में से 48 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। पार्टी का फोकस चाय बागान मजदूरों के अधिकार, भूमि सुधार, स्थानीय भाषाओं को मान्यता देने और AIIMS, IIT, IIM और कैंसर अस्पताल जैसी बड़ी परियोजनाओं के वादों पर है।
हालांकि पार्टी के भीतर गोरखालैंड और कामतापुर जैसे पुराने मुद्दों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं TMC का दावा है कि उसने संगठन को मजबूत किया है और सामाजिक समूहों से दोबारा जुड़ाव बनाकर अपनी स्थिति सुधार ली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार नॉर्थ बंगाल में कोई स्पष्ट लहर नहीं है और मुकाबला पूरी तरह से कड़ा और अनिश्चित बना हुआ है।





