पश्चिम बंगाल

Political वजूद बचाने की जंग तेज

Kanchan Paikara
5 July 2026 6:39 PM IST
Political वजूद बचाने की जंग तेज
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New Delhi नई दिल्ली : संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, लेकिन उससे पहले ही देश की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जल्द ही एक अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले हैं, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महाराष्ट्र के नेता उद्धव ठाकरे की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के कुल 26 बागी सांसदों के भविष्य पर अब अंतिम निर्णय लिया जाना है। इनमें तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद शामिल बताए जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी-अपनी पार्टियों के खिलाफ बगावत का रास्ता अपनाया है। इस पूरे मामले में दलबदल और मर्जर विवाद पर स्पीकर का फैसला निर्णायक माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इन बागी सांसदों की अयोग्यता और सदस्यता को लेकर अंतिम निर्णय सुनाने की तैयारी में हैं। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि इन सांसदों की लोकसभा सदस्यता बनी रहेगी या उन्हें सदन से बाहर होना पड़ेगा।
इस राजनीतिक घटनाक्रम ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है और पूरे मामले पर सभी दलों की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों की बगावत को लेकर नई जानकारी सामने आई है कि इन सभी सांसदों ने पार्टी छोड़कर एक नई राजनीतिक इकाई “नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई)” का दामन थाम लिया है। बताया जा रहा है कि इस नई पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित है।
इन बागी सांसदों ने लोकसभा में अपने लिए अलग सीटिंग व्यवस्था की मांग भी की है और साथ ही केंद्र सरकार के प्रति समर्थन का संकेत दिया है। उनके इस कदम को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे संसद के भीतर समीकरण बदल सकते हैं।
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के मामले में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है और उन पर भी दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ सांसदों की सदस्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे दोनों के राजनीतिक प्रभाव पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
स्पीकर के फैसले को लेकर सभी राजनीतिक दल सतर्क हैं और विपक्षी एकता पर भी इसका सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह बागी सांसद संसद में बने रहेंगे या फिर उनकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी।
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