पश्चिम बंगाल

नारेबाजी पर शुभेंदु का सख्त रुख

Kavita2
29 Aug 2026 9:11 AM IST
नारेबाजी पर शुभेंदु का सख्त रुख
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पश्चिम बंगाल : राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को ‘आजादी’ के नारे लगाने वालों पर निशाना साधते हुए कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब फैसला होना है कि “वही रहेंगे या मैं ही रहूंगा।” शुभेंदु अधिकारी के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

शुभेंदु अधिकारी ने यह बयान रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित अपने एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उनके कार्यक्रम के कारण जादवपुर पुलिस स्टेशन से लेकर सुलेखा तक की सड़क पर भारी भीड़ जुट गई, जिससे लंबे समय तक यातायात प्रभावित रहा। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के पहुंचने के कारण इलाके में जाम की स्थिति बन गई।

कार्यक्रम के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर बने एक भित्तिचित्र को लेकर भी सवाल उठाए। यह भित्तिचित्र 2011 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए माओवादी नेता किशनजी के सम्मान में बनाया गया था, जिस पर ‘लाल सलाम किशनजी’ लिखा हुआ है। शुभेंदु अधिकारी ने इस तरह के चित्र और नारों पर आपत्ति जताते हुए इसे लेकर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग ऐसे विचारों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

बीजेपी नेता ने ‘आजादी’ के नारों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद भी कुछ लोग ऐसे नारे लगाते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में भ्रम पैदा करना है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे तत्वों के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।

शुभेंदु अधिकारी के बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहले से ही कई मुद्दों को लेकर टकराव जारी है। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी के इस बयान को राज्य की राजनीति में बढ़ते विवाद के रूप में देखा जा रहा है।

रक्षाबंधन कार्यक्रम के दौरान बीजेपी समर्थकों की बड़ी मौजूदगी रही। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया था। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण जादवपुर इलाके में कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।

जादवपुर विश्वविद्यालय लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में समय-समय पर विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक समूहों से जुड़े कार्यक्रम होते रहे हैं। दीवारों पर बनाए गए राजनीतिक और वैचारिक संदेशों को लेकर भी कई बार विवाद सामने आते रहे हैं।

किशनजी का नाम पश्चिम बंगाल में लंबे समय से माओवादी आंदोलन से जुड़ा रहा है। वह प्रतिबंधित माओवादी संगठन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। 2011 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में उनकी मौत हुई थी। इसके बाद कुछ समूहों ने उन्हें अपने आंदोलन के प्रतीक के रूप में पेश किया, जबकि विरोधी दलों ने इसका विरोध किया।

शुभेंदु अधिकारी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी राज्य में राष्ट्रवाद और कानून व्यवस्था के मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी।

वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी का यह बयान आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में नया मुद्दा बन सकता है। पश्चिम बंगाल में अगले चुनावों को देखते हुए बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी पहले से तेज है।

फिलहाल शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय और ‘आजादी’ के नारों को लेकर बहस शुरू हो गई है। बीजेपी इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी गर्मी बढ़ने की संभावना है।

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