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ममता के काफिले के विरोध पर शुभेंदु का हमला, बोले- जनता में गुस्सा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हलीशहर दौरे के दौरान सामने आए विरोध को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को दावा किया कि उत्तर 24 परगना जिले के हलीशहर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को जिस विरोध का सामना करना पड़ा, वह किसी राजनीतिक दल की ओर से प्रायोजित नहीं था, बल्कि जनता के भारी गुस्से का परिणाम था।
शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के एक मृत कार्यकर्ता के परिजन से मुलाकात करने के लिए हलीशहर जा रही थीं। इसी दौरान उन्हें स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ा। अधिकारी ने दावा किया कि विरोध के दौरान वहां न तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई कार्यकर्ता मौजूद था और न ही पार्टी का झंडा दिखाई दिया। उन्होंने इसी आधार पर इसे आम लोगों के आक्रोश से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री और राज्य सरकार पर निशाना साधा।
हलीशहर दौरे को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
ममता बनर्जी का हलीशहर दौरा ऐसे समय हुआ, जब राज्य में राजनीतिक माहौल पहले से ही गरम है। तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत के बाद मुख्यमंत्री उनके परिवार से मिलने पहुंचीं। इसी दौरान विरोध की घटना सामने आने के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
शुभेंदु अधिकारी ने विरोध को लेकर भाजपा पर लगाए जा सकने वाले आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि वहां भाजपा का कोई कार्यकर्ता या पार्टी का झंडा मौजूद नहीं था, तो इस घटना को भाजपा से जोड़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने इसे स्थानीय लोगों के गुस्से का परिणाम बताया।
अधिकारी का दावा है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ लोगों की नाराजगी स्वत: सामने आई। हालांकि, इस विरोध के पीछे स्थानीय लोगों की वास्तविक शिकायतें क्या थीं और विरोध में शामिल लोगों की पहचान क्या थी, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं।
‘भाजपा का कोई कार्यकर्ता नहीं था’
शुभेंदु अधिकारी ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हलीशहर में हुए विरोध के दौरान भाजपा का कोई कार्यकर्ता मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि वहां पार्टी का झंडा भी नहीं था। उनके मुताबिक, इससे यह स्पष्ट होता है कि घटना को भाजपा के राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विपक्ष के नेता ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान लोगों की ओर से सामने आया विरोध राजनीतिक कार्यकर्ताओं की रणनीति का हिस्सा नहीं था। उनका कहना है कि यह सीधे तौर पर जनता के असंतोष को दर्शाता है।
भाजपा नेता के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटना को लेकर चर्चा और तेज होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंची थीं ममता
ममता बनर्जी हलीशहर में तृणमूल कांग्रेस के एक मृत कार्यकर्ता के परिजन से मुलाकात करने पहुंची थीं। मुख्यमंत्री का यह दौरा पार्टी कार्यकर्ता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिहाज से महत्वपूर्ण था।
हालांकि, दौरे के दौरान विरोध की घटना ने इसे राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना दिया। भाजपा ने इस घटना को सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ लोगों की नाराजगी से जोड़ने की कोशिश की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से घटना को अलग नजरिए से देखा जा सकता है।
बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच लंबे समय से राजनीतिक टकराव जारी है। दोनों दल एक-दूसरे पर राज्य के राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने और जनता के बीच गलत धारणा पैदा करने के आरोप लगाते रहे हैं।
ममता बनर्जी के दौरे के दौरान हुए विरोध को लेकर भी यही राजनीतिक संघर्ष दिखाई दे रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने जहां इसे जनता का गुस्सा बताया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इस घटना को भाजपा की राजनीति से जोड़कर देख सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी बढ़ने की संभावना है।
‘जनता के गुस्से’ को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश
शुभेंदु अधिकारी का बयान केवल एक घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। भाजपा लगातार राज्य सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों को लेकर जनता की नाराजगी का दावा करती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के काफिले के विरोध को भी भाजपा जनता के असंतोष के उदाहरण के तौर पर पेश कर सकती है।
अधिकारी ने अपने बयान में भाजपा की मौजूदगी से इनकार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि विरोध स्वत:स्फूर्त था। यदि इस दावे को राजनीतिक विमर्श में जगह मिलती है, तो भाजपा इसे राज्य सरकार के खिलाफ जनता के कथित असंतोष के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
घटना को लेकर आधिकारिक तस्वीर महत्वपूर्ण
हालांकि, किसी भी राजनीतिक दावे के बीच घटना की पूरी तस्वीर सामने आना महत्वपूर्ण है। विरोध में कौन लोग शामिल थे, उनकी मांग या नाराजगी का कारण क्या था और घटना किन परिस्थितियों में हुई, इन सवालों के जवाब से ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के हलीशहर दौरे के दौरान हुए विरोध को जनता के भारी गुस्से का संकेत बताया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वहां भाजपा का कोई कार्यकर्ता या पार्टी का झंडा नहीं था। उनके इस बयान ने घटना को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
अब निगाह तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि राज्य की राजनीति में हलीशहर की यह घटना आने वाले दिनों में किस तरह मुद्दा बनती है। ममता बनर्जी का दौरा जहां पार्टी के मृत कार्यकर्ता के परिवार से संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से था, वहीं विरोध की घटना ने इसे एक नए राजनीतिक विवाद में बदल दिया है।





