पश्चिम बंगाल

हुमायूं कबीर की हिरासत पर सुवेंदु अधिकारी का बयान

Ratna Netam
6 Oct 2026 2:36 PM IST
हुमायूं कबीर की हिरासत पर सुवेंदु अधिकारी का बयान
x
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को हिरासत में लिए जाने के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान नियम सभी जनप्रतिनिधियों पर समान रूप से लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी नेता को सुरक्षा घेरा मिलने का मतलब यह नहीं है कि वह अपने निर्धारित मतदान केंद्र से बाहर दूसरे बूथों पर जाकर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर सकता है।
मंगलवार को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में अपना वोट डालने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर की हिरासत से जुड़े सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश सभी उम्मीदवारों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों पर समान रूप से लागू होते हैं। अधिकारी ने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपने तय बूथ के बाहर जाकर मतदान प्रक्रिया में दखल देता है तो चुनाव आयोग और पुलिस को उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।
अधिकारी ने कहा, “आज मैं भी… वे मुझे भी हिरासत में ले सकते हैं। हमारे पास सुरक्षा घेरा है, है ना? हम सुरक्षा प्राप्त लोग हैं—विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, सभी। क्या उन्हें अपने तय बूथ से बाहर जाने की इजाजत है? वह अपने बूथ से बाहर गए और दखलंदाजी की।” मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव के दौरान कानून और निर्वाचन आयोग के नियमों का पालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
हुमायूं कबीर को मंगलवार को मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर में पुलिस ने हिरासत में लिया। उस समय विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी था। रिपोर्टों के मुताबिक, कबीर का पुलिसकर्मियों के साथ तीखा विवाद हुआ था। इसके बाद पुलिस उन्हें उनके पार्टी कार्यालय से अपने साथ ले गई। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव बढ़ गया और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।
कबीर ने इससे पहले पुलिस पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनके समर्थकों और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। पुलिस से बहस के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना था कि मतदान प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।
इस घटना को लेकर चुनाव आयोग ने भी रिपोर्ट मांगी है। रेजीनगर में मतदान के दौरान कबीर की गतिविधियों और उनकी हिरासत की परिस्थितियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों से मांगी गई। उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या मतदान केंद्र के आसपास अनधिकृत हस्तक्षेप को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए थे।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा प्राप्त राजनेताओं के साथ पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं, लेकिन इससे उन्हें चुनावी नियमों से छूट नहीं मिलती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें भी उसी मतदान केंद्र पर जाना चाहिए जहां उनका नाम दर्ज है। यदि वे किसी अन्य मतदान केंद्र पर जाकर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करें तो उनके खिलाफ भी वही नियम लागू होंगे जो दूसरे नेताओं पर लागू होते हैं।
नंदीग्राम में मतदान के दौरान सुवेंदु अधिकारी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने पहुंचे। वोट डालने के बाद उन्होंने कहा कि वे नंदीग्राम के मतदाता बने रहेंगे। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। पश्चिम बंगाल में मंगलवार को नंदीग्राम और रेजीनगर सहित विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान हुआ।
रेजीनगर में सुबह से ही राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण रहा। हुमायूं कबीर ने सुरक्षा बलों की तैनाती और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि कबीर ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया और समर्थकों को भी पुलिस के खिलाफ विरोध करने के लिए कहा। इसके बाद कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
AJUP की ओर से कबीर की हिरासत पर आपत्ति जताई गई, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बताया। इस बीच चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की। मतदान केंद्रों के आसपास केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस की तैनाती भी की गई थी।
सुवेंदु अधिकारी ने जोर देकर कहा कि चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को निर्वाचन आयोग के नियमों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक पद या सुरक्षा व्यवस्था को नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, निष्पक्ष मतदान के लिए यह जरूरी है कि सभी उम्मीदवार और राजनीतिक कार्यकर्ता निर्धारित सीमाओं का पालन करें।
रेजीनगर में हुमायूं कबीर की हिरासत अब उपचुनाव के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस घटना को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग और पुलिस के लिए प्राथमिकता मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना है।
फिलहाल हुमायूं कबीर से जुड़े घटनाक्रम को लेकर प्रशासनिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है। चुनाव आयोग की ओर से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि चुनावी नियमों के उल्लंघन के मामले में किसी भी नेता को विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए और कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
Next Story