पश्चिम बंगाल

शुभेंदु अधिकारी ने संभाला बुलडोजर लाखों कफ सिरप की बोतलों पर चला पंजा

Ratna Netam
2 Sept 2026 5:42 PM IST
शुभेंदु अधिकारी ने संभाला बुलडोजर लाखों कफ सिरप की बोतलों पर चला पंजा
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कोलकाता/बालुरघाट। पश्चिम बंगाल में नशीले पदार्थों और अवैध कफ सीरप की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बुधवार को दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट में अलग ही नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री **शुभेंदु अधिकारी खुद रोड रोलर की ड्राइविंग सीट पर बैठ गए** और जब्त की गई करीब **दो लाख प्रतिबंधित कफ सीरप की बोतलों** के ऊपर रोड रोलर चलाकर उन्हें नष्ट किया। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय मंत्री और बालुरघाट से सांसद **सुकांत मजूमदार** भी रोड रोलर पर मौजूद रहे।
यह कार्रवाई बालुरघाट में दक्षिण दिनाजपुर के पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने की गई। बड़ी संख्या में जब्त कफ सीरप की बोतलों को यहां व्यवस्थित तरीके से रखा गया था। इसके बाद हेलमेट पहने शुभेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार रोड रोलर पर सवार हुए। शुभेंदु ने खुद मशीन चलाते हुए बोतलों के एक हिस्से को कुचल दिया। कार्यक्रम में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय भी मौजूद थे।
करीब दो लाख बोतलों पर चला रोड रोलर
बालुरघाट में आयोजित इस कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा मुख्यमंत्री का खुद रोड रोलर चलाना रहा। पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने जब्त की गई करीब दो लाख कफ सीरप की बोतलें रखी गई थीं।
शुभेंदु अधिकारी रोड रोलर की ड्राइविंग सीट पर बैठे और बोतलों के ऊपर से उसे निकाल दिया। उनके साथ सुकांत मजूमदार भी मौजूद थे। रोड रोलर गुजरते ही बड़ी संख्या में बोतलें टूट गईं। प्रशासन ने इसे नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के प्रतीकात्मक प्रदर्शन के रूप में पेश किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका पहला संदेश युवाओं को नशे से बाहर निकालना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल को भी नशा मुक्त बनाने की दिशा में अभियान चलाया जाएगा।
चार महीने में संयुक्त कार्रवाई से जब्ती का दावा
शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक जिन प्रतिबंधित कफ सीरप की बोतलों को नष्ट किया गया, उन्हें पिछले करीब चार महीनों में अलग-अलग कार्रवाइयों के दौरान जब्त किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि इन बरामदगियों में सीमा सुरक्षा बल यानी **BSF और पश्चिम बंगाल पुलिस की संयुक्त कार्रवाई** महत्वपूर्ण रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद नशीले पदार्थों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई और चार महीनों में संयुक्त अभियानों के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री जब्त हुई।
कार्यक्रम में बोतलों को नष्ट करने को उन्होंने प्रतीकात्मक कार्रवाई बताया और कहा कि इसके जरिए सरकार नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को स्पष्ट संदेश देना चाहती है।
बांग्लादेश तस्करी की थी आशंका
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि जब्त किए गए प्रतिबंधित कफ सीरप को **बांग्लादेश में तस्करी के लिए ले जाने की योजना थी।** दक्षिण दिनाजपुर जिला भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़ा हुआ है और इस वजह से सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकना पुलिस तथा BSF के लिए बड़ी चुनौती रहती है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बांग्लादेश तस्करी की बात मुख्यमंत्री द्वारा कही गई है। अलग-अलग जब्तियों से जुड़े सभी मामलों की न्यायिक स्थिति और आरोपियों की भूमिका संबंधित जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के अधीन होगी।
शुभेंदु ने दावा किया कि पिछले चार महीनों में BSF और पुलिस के बीच समन्वय बेहतर हुआ है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रतिबंधित पदार्थों की बरामदगी में मदद मिली है।
तस्करों को मुख्यमंत्री की चेतावनी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अवैध कफ सीरप के कारोबार में शामिल लोगों को चेतावनी भी दी।
उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह के कारोबार में शामिल होंगे, उन्हें कानून के तहत कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार को लेकर सख्त रुख अपनाएगी।
शुभेंदु अधिकारी ने इस कार्रवाई को युवाओं को नशे से बचाने के अभियान से जोड़ा। उनके मुताबिक सरकार का उद्देश्य केवल अवैध सामग्री जब्त करना नहीं बल्कि इसके पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करना है।
आखिर कफ सीरप को लेकर इतनी सख्ती क्यों?
हर कफ सीरप नशीला या प्रतिबंधित नहीं होता। कई दवाओं में इस्तेमाल होने वाला **कोडीन** चिकित्सकीय उपयोग वाला पदार्थ है, लेकिन कोडीन आधारित कफ सीरप को निर्धारित नियमों से हटाकर अवैध रूप से नशे के लिए इस्तेमाल या तस्करी किए जाने का खतरा रहता है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मुताबिक कोडीन अफीम से प्राप्त पदार्थ है और नियंत्रित फार्मास्युटिकल तैयारियों में इसका वैध चिकित्सकीय इस्तेमाल होता है। लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावना के कारण अवैध सप्लाई और तस्करी करने वाले नेटवर्क ऐसी दवाओं को निशाना बनाते हैं।
इसी वजह से बिना वैध दस्तावेज और नियमों के विपरीत बड़ी मात्रा में ऐसी दवाओं का परिवहन जांच एजेंसियों के रडार पर रहता है।
जुलाई में पश्चिम बंगाल से पकड़ी गई थीं 56 हजार से ज्यादा बोतलें
पश्चिम बंगाल में कोडीन आधारित कफ सीरप की अवैध सप्लाई के खिलाफ हाल के महीनों में अन्य एजेंसियों ने भी बड़ी कार्रवाई की है।
डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस यानी DRI ने जुलाई 2026 में पश्चिम बंगाल के **डानकुनी स्थित एक गोदाम से 56,225 बोतल कोडीन आधारित कफ सीरप** बरामद करने की जानकारी दी थी। इन्हें 104 सीलबंद लोहे के ड्रमों में चाइना क्ले पाउडर की परत के नीचे छिपाया गया था।
इसी अवधि में त्रिपुरा से जुड़ी एक दूसरी कार्रवाई में 55,626 बोतलें पकड़ी गई थीं। दोनों अभियानों में कुल मिलाकर लगभग **1.11 लाख बोतलें** जब्त हुई थीं और एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की गई थी।
DRI के मुताबिक इस तरह की बरामदगियां संगठित नेटवर्क द्वारा फार्मास्युटिकल उत्पादों को अवैध इस्तेमाल और तस्करी के लिए डायवर्ट करने की कोशिशों को दिखाती हैं।
BSF-पुलिस के तालमेल पर जोर
भारत-बांग्लादेश सीमा के कारण पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।
बालुरघाट के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इसी तालमेल पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि दक्षिण दिनाजपुर में BSF और पुलिस के संयुक्त अभियानों के कारण पिछले चार महीनों में नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी गई है।
सीमा पर तस्करी रोकने के लिए केवल आखिरी चरण में सामान पकड़ना पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए सप्लाई चेन, स्टोरेज पॉइंट, परिवहन करने वालों और आगे माल लेने वाले लोगों की पहचान भी जरूरी होती है।
इसीलिए बड़ी बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहता है कि माल कहां से आया, किसके पास जाना था और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था।
'नशा मुक्त बंगाल' का दिया संदेश
शुभेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम को केवल जब्त सामग्री नष्ट करने तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे 'नशा मुक्त बंगाल' के संदेश से जोड़ा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल बेहद प्रासंगिक है और पश्चिम बंगाल में भी नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री का कहना था कि युवाओं को नशे से दूर करना सरकार की प्राथमिकता है।
इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए जब्त बोतलों को सार्वजनिक रूप से रोड रोलर से नष्ट किया गया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार बालुरघाट पहुंचे शुभेंदु
बुधवार का दौरा एक और वजह से महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी का यह **पहला बालुरघाट दौरा** था।
उनके दौरे में केवल नशा विरोधी कार्यक्रम ही शामिल नहीं था। जिले में प्रशासनिक कार्यक्रम भी निर्धारित थे और बालुरघाट एयरपोर्ट के काम का निरीक्षण भी उनके कार्यक्रम में शामिल बताया गया।
उन्होंने बालुरघाट में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की घोषणा भी की।
इस तरह मुख्यमंत्री का दौरा प्रशासनिक और विकास कार्यों के साथ कानून-व्यवस्था तथा नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के संदेश पर केंद्रित रहा।
रोड रोलर चलाने की तस्वीर बनी चर्चा का केंद्र
हालांकि पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के खुद रोड रोलर चलाने की हुई।
आमतौर पर जब्त नशीले पदार्थों और प्रतिबंधित सामग्री का निपटान निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। बालुरघाट में रखी गई जब्त बोतलों के एक हिस्से को मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से रोड रोलर से कुचल दिया।
इस दौरान शुभेंदु और सुकांत मजूमदार दोनों हेलमेट लगाए हुए थे। रोड रोलर आगे बढ़ा और उसके नीचे रखी कफ सीरप की बोतलें टूटती चली गईं।
सरकार ने इस दृश्य के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
केवल बरामदगी नहीं नेटवर्क तोड़ना बड़ी चुनौती
करीब दो लाख जब्त कफ सीरप की बोतलों का नष्ट किया जाना अपने आप में बड़ा आंकड़ा है, लेकिन अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने की असली चुनौती इसके नेटवर्क को तोड़ना है।
जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होता है कि इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित या नियंत्रित दवाएं अवैध बाजार तक कैसे पहुंच रही हैं। कौन इन्हें खरीद रहा है, कौन स्टोर कर रहा है, किस माध्यम से सीमा तक पहुंचाया जा रहा है और इसके पीछे आर्थिक नेटवर्क कौन चला रहा है।
जुलाई में DRI द्वारा पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में कुल करीब 1.11 लाख कोडीन आधारित कफ सीरप की बोतलों की जब्ती ने भी यह दिखाया था कि दवाओं को छिपाकर ले जाने के लिए तस्कर नए तरीके अपनाते हैं।
अब बालुरघाट में करीब दो लाख जब्त बोतलों पर रोड रोलर चलाकर शुभेंदु अधिकारी ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सख्त संदेश देने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि युवाओं को नशे से बचाना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है और अवैध कफ सीरप के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में निगाह इस बात पर होगी कि सीमा से जुड़े जिलों में BSF और राज्य पुलिस का संयुक्त अभियान इस तस्करी नेटवर्क को रोकने में कितना प्रभावी साबित होता है।
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