पश्चिम बंगाल

कोलकाता भगदड़ में 19 मौतों पर CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, बोले- मानवीय चूक से हुआ हादसा

Kavita2
24 Oct 2026 11:25 AM IST
कोलकाता भगदड़ में 19 मौतों पर CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, बोले- मानवीय चूक से हुआ हादसा
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीषण भगदड़ को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 लोगों की जान लेने वाला यह हादसा मुख्य रूप से मानवीय चूक का परिणाम था। उन्होंने घटना को बेहद दर्दनाक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत होना अत्यंत दुखद है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को भगदड़ में जान गंवाने वाले दो लोगों के घर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मानिकतला के बागमारी इलाके में रहने वाले शुभम सोनकर और श्यामपुकुर निवासी मिठू मंडल के घर पहुंचे। दोनों की चोरबागान पूजा पंडाल में मची भगदड़ के दौरान मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री ने शोकसंतप्त परिवारों से बातचीत की और उनके दुख में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मानवीय गलती से गई 19 लोगों की जान

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि चोरबागान में हुई भगदड़ के पीछे प्रथम दृष्टया मानवीय चूक प्रमुख कारण दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि हादसे से जुड़ी अन्य परिस्थितियों और जिम्मेदारियों की जांच कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, घटना की जांच की जिम्मेदारी एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी गई है। जांच के दौरान पुलिस आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सरकार को सौंपे जाने की उम्मीद है। इसके बाद रिपोर्ट के निष्कर्षों और सिफारिशों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों को जनता के सामने रखा जाएगा और जिम्मेदारी तय करने में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

पीड़ित शुभम सोनकर के घर पहुंचे मुख्यमंत्री

शुक्रवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सबसे पहले मानिकतला के बागमारी इलाके में रहने वाले शुभम सोनकर के परिजनों से मिलने पहुंचे।

शुभम की मौत चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के दौरान हो गई थी। मुख्यमंत्री ने परिवार के सदस्यों से बातचीत करते हुए उन्हें सांत्वना दी।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना में किसी अपने को खोने का दुख बेहद गहरा होता है और सरकार पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।

इसके बाद मुख्यमंत्री श्यामपुकुर निवासी मिठू मंडल के घर पहुंचे। वहां भी उन्होंने परिजनों से मुलाकात की और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए घटना की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

17 अक्टूबर को दुर्गा पूजा पंडाल में मची थी भगदड़

कोलकाता के चोरबागान में 17 अक्टूबर की शाम दुर्गा पूजा के दौरान बड़ा हादसा हुआ था। सप्तमी के अवसर पर प्रसिद्ध पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।

शाम करीब साढ़े सात बजे अचानक बारिश शुरू होने के बाद स्थिति बिगड़ गई। बारिश से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग पंडाल की ओर बढ़ने लगे।

इस दौरान पहले से मौजूद श्रद्धालुओं और बाहर से आने वाले लोगों के बीच भीड़ का दबाव बढ़ गया। संकरे रास्तों पर लोगों को आगे बढ़ने और बाहर निकलने में परेशानी होने लगी।

देखते ही देखते अफरातफरी मच गई और कई लोग भीड़ के दबाव में नीचे गिर पड़े। हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हुए।

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं तथा घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

पंडाल में सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

चोरबागान भगदड़ के बाद पूजा पंडाल में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, पंडाल के आसपास संकरी गलियां थीं और श्रद्धालुओं के प्रवेश तथा निकास की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त स्वयंसेवक मौजूद नहीं थे। इसके अलावा अचानक बारिश और आयोजकों की घोषणाओं से भी लोगों में घबराहट बढ़ने की बात सामने आई।

जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आयोजन स्थल पर कितने लोगों के प्रवेश की अनुमति थी और भीड़ नियंत्रण के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई थीं।

इसके साथ ही आयोजकों, निजी सुरक्षा कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

सात लोगों की गिरफ्तारी, जांच जारी

हादसे के बाद कोलकाता पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया था।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें गैर इरादतन हत्या से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।

पुलिस यह जांच कर रही है कि भगदड़ के समय सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था।

जांच में पूजा समिति के सदस्यों, सुरक्षा कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

हालांकि, किसी व्यक्ति या संस्था की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।

तीन महीने में सामने आएगी जांच रिपोर्ट

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार ने हादसे की विस्तृत जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच की व्यवस्था की है।

जांच के दौरान घटनास्थल की परिस्थितियों, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक तैयारियों का अध्ययन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच रिपोर्ट तीन महीने के भीतर प्रस्तुत की जाएगी। सरकार रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करेगी और निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

8000 पूजा समितियों के साथ बैठक करेंगे मुख्यमंत्री

चोरबागान हादसे के बाद राज्य सरकार ने अगले वर्ष दुर्गा पूजा के आयोजन के लिए सुरक्षा तैयारियां अभी से शुरू करने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि 26 अक्टूबर को लगभग आठ हजार पूजा समितियों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की जाएगी।

इस बैठक में अगले वर्ष होने वाले दुर्गा पूजा आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों पर चर्चा होगी।

सरकार का उद्देश्य ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि भविष्य में बड़े पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास, भीड़ नियंत्रण तथा आपातकालीन व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था की होगी समीक्षा

चोरबागान भगदड़ ने बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक साथ पहुंचने की स्थिति में पर्याप्त प्रवेश और निकास मार्ग, प्रशिक्षित स्वयंसेवक तथा आपातकालीन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है।

फिलहाल राज्य सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को सहायता का भरोसा दिलाते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

अब सभी की नजर जांच के निष्कर्षों पर रहेगी, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि चोरबागान में सुरक्षा व्यवस्था कहां विफल हुई और 19 लोगों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार था।

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