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पश्चिम बंगाल
सुकांता मजूमदार ने ममता बनर्जी के राज्य गीत पर उठाए सवाल
SHIDDHANT
7 Nov 2025 9:01 PM IST

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Bangal बंगाल। केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने पश्चिम बंगाल में राज्य गीत के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ को राज्य गीत के रूप में चुन लिया था। लेकिन, वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने एक दूसरा गीत राज्य गीत के रूप में घोषित किया। मजूमदार ने इस निर्णय को समयबद्ध और संदिग्ध बताते हुए कहा कि इसे कल भी किया जा सकता था, लेकिन इसे आज ही घोषित करना ध्यान आकर्षित करता है। केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित मूल गीत ही राज्य गीत के रूप में मान्य होना चाहिए। यदि ममता बनर्जी द्वारा संपादित संस्करण को राज्य गीत के रूप में घोषित किया गया है, तो उन्हें यह स्वीकार नहीं होगा। मजूमदार ने स्पष्ट किया कि संपादन किए गए गीत को वे राज्य गीत के रूप में मान्यता नहीं देंगे।
मजूमदार के अनुसार यह मुद्दा केवल गीत का नहीं है, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य गीत का चुनाव पारदर्शी और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुरूप होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी से स्पष्टता की मांग की कि आखिर किस संस्करण को राज्य गीत माना गया है—मूल टैगोर का या संपादित संस्करण। राज्य गीत का विवाद राजनीतिक रूप भी ले चुका है। मजूमदार ने इसे बंगाल में सांस्कृतिक और राजनीतिक संदर्भ में गंभीर मामला बताया। उनके अनुसार, राज्य की जनता को इस विषय में सही जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने चेताया कि अगर राज्य गीत को लेकर ऐतिहासिक और साहित्यिक सच्चाई की अनदेखी की गई, तो इसका विरोध किया जाएगा।
इस बयान से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। विपक्ष ने भी इस कदम की आलोचना की है और मुख्यमंत्री से स्पष्टता की मांग की है। इस विवाद ने बंगाल की राजनीति में सांस्कृतिक अधिकार और साहित्यिक सम्मान के मुद्दे को उजागर किया है। मजूमदार ने दोहराया कि बंगाल का असली राज्य गीत वही होना चाहिए जो रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा और जिसे साहित्यिक दृष्टि से मान्यता प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह केवल गीत का मामला नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और पहचान से जुड़ा मामला है, और इसे लेकर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। इस विवाद ने राज्य में राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को नए आयाम दे दिए हैं।
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