पश्चिम बंगाल

Mamata सरकार की योजनाओं पर सख्ती जारी

Saba Naaz
3 July 2026 5:03 PM IST
Mamata सरकार की योजनाओं पर सख्ती जारी
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पश्चिम बंगाल: कल्याणकारी योजनाओं को लेकर राज्य में बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य की नवगठित भाजपा सरकार ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की प्रमुख सामाजिक कल्याण योजनाओं को जारी रखने का निर्णय लिया है, लेकिन अब इन योजनाओं में लाभार्थियों की सघन जांच की जाएगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल वास्तविक और पात्र लोगों तक सरकारी लाभ पहुंचाना है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, लाभार्थियों की सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जाएगा और सभी नामों का मिलान अंतिम वोटर लिस्ट से किया जाएगा। इसके अलावा डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन भी किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह के फर्जीवाड़े और अपात्र लाभार्थियों को योजनाओं से बाहर किया जा सके। अधिकारियों का दावा है कि पिछले वर्षों में कई योजनाओं में राजनीतिक प्रभाव के चलते अपात्र लोगों को भी शामिल किया गया था।

विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान राज्य में करीब 80 लाख संदिग्ध नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। सरकार अब इन हटाए गए नामों को कल्याणकारी योजनाओं की सूची से भी बाहर करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विस्तृत डेटा मिलान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार ने हाल ही में शुरू किए गए जनकल्याण शिविरों में प्राप्त आवेदनों की भी जांच शुरू कर दी है। वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन जैसी योजनाओं के वितरण को फिलहाल सत्यापन पूरा होने तक रोक दिया गया है। वहीं कन्याश्री और रूपश्री जैसी बड़ी योजनाओं पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

सबसे बड़ा बदलाव कृषि क्षेत्र की ‘कृषक बंधु’ योजना में देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा सामने आया था, जहां एक ही भूमि पर कई लाभार्थी लाभ उठा रहे थे। इसके स्थान पर सरकार ने नई व्यवस्था के तहत किसानों को सालाना 3000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव तैयार किया है। कृषि विभाग के अनुसार, सख्त जांच के बाद लगभग 40 प्रतिशत अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाया जा सकता है।

सरकार का कहना है कि यह पूरी कवायद पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी धन के सही उपयोग के लिए की जा रही है। वहीं विपक्ष इस फैसले को लेकर सवाल उठा रहा है और इसे राजनीतिक निर्णय बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति और अधिक गरमाने की संभावना है।

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