पश्चिम बंगाल

बंगाल की राजनीति में हलचल! TMC MLA मदन मित्रा ने दिए संन्यास के संकेत

Shubhra Nandy
23 Oct 2026 8:12 AM IST
बंगाल की राजनीति में हलचल! TMC MLA मदन मित्रा ने दिए संन्यास के संकेत
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अब राजनीति से नफरत
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने बेबाक बयानों और अलग अंदाज के लिए चर्चित तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक मदन मित्रा ने सक्रिय राजनीति से दूर होने के संकेत देकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कामारहाटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक मदन मित्रा ने मौजूदा राजनीतिक माहौल पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीति में असामाजिक और अनैतिक गतिविधियों का प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति के प्रति उनकी नफरत लगातार बढ़ती जा रही है और अब वह धीरे-धीरे इससे दूरी बनाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, मदन मित्रा ने राजनीति से संन्यास लेने या विधायक पद से इस्तीफा देने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। उनके राजनीति छोड़ने संबंधी बयान की खबर 1 अक्टूबर 2026 को भी प्रकाशित हुई थी।
राजनीति से क्यों नाराज हैं मदन मित्रा?
मदन मित्रा ने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीति में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है, जिनका सार्वजनिक जीवन में आचरण सवालों के घेरे में रहता है। उनके मुताबिक, राजनीति का उद्देश्य लोगों की सेवा करना होना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कई तरह की अनैतिक गतिविधियों ने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यवस्था में गलत गतिविधियों में शामिल लोगों की संख्या बढ़ जाती है, तो अच्छे और बुरे लोगों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। मित्रा ने राजनीति को असामाजिक तत्वों का ठिकाना बताते हुए कहा कि वह इस व्यवस्था से लगातार निराश होते जा रहे हैं। यह उनका व्यक्तिगत आकलन है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया है।
राजनीति से दूर होने पर कर रहे विचार
मदन मित्रा ने कहा कि वह अपने राजनीतिक जीवन के अगले चरण को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। करीब तीन दशक तक राजनीति में सक्रिय रहने वाले मदन मित्रा अब सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों से धीरे-धीरे दूरी बनाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि राजनीति में बनी वर्तमान परिस्थितियों के कारण उनका मोहभंग हो रहा है।हालांकि, उनके बयान से यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह कब तक सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे या भविष्य में किसी चुनाव में हिस्सा लेंगे अथवा नहीं। उनके करीब 30 वर्षों के राजनीतिक सफर और संन्यास के संकेत की पुष्टि विभिन्न समाचार रिपोर्टों में की गई है।

विजयादशमी पर समर्थकों से नहीं मिल पाने का जताया दुख

दिए गए घटनाक्रम के अनुसार, मदन मित्रा ने विजयादशमी के अवसर पर अपने समर्थकों और मतदाताओं से मुलाकात नहीं कर पाने पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के समर्थन से उन्हें चुनाव में जीत मिली, उनसे त्योहार के अवसर पर मुलाकात न कर पाना उनके लिए निराशाजनक रहा। मित्रा ने इसकी वजह सुरक्षा संबंधी चिंताओं और हिंसा की आशंका को बताया। उनका दावा है कि पूर्व में उन पर जानलेवा हमले का प्रयास हुआ था। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को जानकारी देने और पुलिस को आवश्यक निर्देश दिए जाने की बात भी कही। हालांकि, इन आरोपों और कथित निर्देशों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
ममता बनर्जी से दूरी के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
मदन मित्रा कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। वह तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर से पार्टी से जुड़े रहे और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। लेकिन जुलाई 2026 में उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देकर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही गुट का साथ देने की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने उस समय स्पष्ट किया था कि वह तृणमूल कांग्रेस के विधायक बने हुए हैं। उनके इस कदम को पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों से जोड़कर देखा गया।
ईश्वर के अलावा कोई नहीं दे सकता आश्रय
राजनीतिक गुट बदलने और भविष्य की रणनीति से जुड़े सवालों पर मदन मित्रा ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति को ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार, ईश्वर के अलावा कोई किसी को स्थायी आश्रय नहीं दे सकता। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियां नहीं भूलने की अपील की। मित्रा ने कहा कि राजनीति में पद और प्रभाव मिलने के बाद भी जनप्रतिनिधियों को आम लोगों से जुड़ा रहना चाहिए।
तीन दशक पुराना राजनीतिक सफर
मदन मित्रा पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनका नाम तृणमूल कांग्रेस के पुराने और चर्चित नेताओं में शामिल रहा है। वह अपनी बोलने की शैली, सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रियता और राजनीतिक बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पहली सरकार में उन्होंने परिवहन और खेल विभाग से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभाली थीं। उनका राजनीतिक जीवन विवादों से भी जुड़ा रहा है। सारदा चिटफंड मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जबकि नारदा स्टिंग मामले में भी जांच एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की थी। उन्होंने इन मामलों में अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।
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