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Bengal में सत्ता परिवर्तन के बाद भ्रष्टाचार मामलों की जांच तेज होने के संकेत

West Bengal पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार मामलों की जांच तेज होने के संकेत मिलने लगे हैं। राज्य में नई राजनीतिक स्थिति बनने के बाद कई मामलों की दोबारा समीक्षा और जांच की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच सुवेंदु मंत्रिमंडल के नए सदस्य और रानीबांध से भारतीय जनता पार्टी के विधायक खुदीराम टुडू ने पदभार संभालते ही एक बड़े मामले को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कही है। उन्होंने ‘फर्जी अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र’ से जुड़े कथित घोटाले की जड़ तक पहुंचने और इसकी पूरी जांच कराने का संकल्प लिया है।
खुदीराम टुडू ने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों से जुड़ी योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था का लाभ यदि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर गलत लोगों तक पहुंचा है तो यह गंभीर मामला है और इसकी पूरी तरह से जांच जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नए राजनीतिक बदलाव के बाद इस तरह के मामलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ती नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कई पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली जा सकती हैं और विभिन्न विभागों में जारी प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया की समीक्षा की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों के दुरुपयोग की शिकायतें पहले से सामने आती रही हैं।
राजनीतिक हलकों में इस कदम को नई सरकार की सख्त नीति के रूप में देखा जा रहा है। वहीं विपक्षी दलों की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया आने की संभावना भी जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल शुरुआती समीक्षा की बात कही जा रही है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होने की उम्मीद है।
राज्य में बदलते राजनीतिक माहौल के बीच इस तरह के मामलों ने एक बार फिर चर्चा को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस जांच की दिशा और गति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।





