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पश्चिम बंगाल
शिवनारायणपुर स्टेशन नए स्वरूप में तैयार, विक्रमशिला की विरासत और आधुनिक रेलवे सुविधाओं का दिखेगा अनूठा संगम
SHIDDHANT
15 July 2026 11:37 PM IST

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Kolkata कोलकाता। पूर्वी रेलवे के अंतर्गत आने वाले बिहार के शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत व्यापक पुनर्विकास किया गया है। पुनर्निर्मित स्टेशन का उद्घाटन जल्द ही प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। नए स्वरूप में तैयार यह स्टेशन आधुनिक रेलवे सुविधाओं के साथ बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी प्रस्तुत करेगा।
शिवनारायणपुर स्टेशन का विशेष महत्व इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण भी है। यह प्राचीन विक्रमशिला महाविहार के निकट स्थित है, जिसे आठवीं शताब्दी में पाल वंश के शासनकाल के दौरान स्थापित किया गया था। विक्रमशिला, नालंदा की तरह प्राचीन भारत का एक प्रमुख बौद्ध शिक्षा केंद्र था, जहां देश-विदेश से विद्यार्थी और विद्वान अध्ययन के लिए आते थे। यह क्षेत्र ऐतिहासिक अंग महाजनपद का भी हिस्सा रहा है, जिसका उल्लेख कई प्राचीन भारतीय ग्रंथों में मिलता है।
स्टेशन के पुनर्विकास में आधुनिक वास्तुकला और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान का संतुलित समावेश किया गया है। स्टेशन का बाहरी ढांचा समकालीन डिजाइन पर आधारित है, जिसमें विशाल ग्लास फेसाड, प्रीमियम एसीपी क्लैडिंग और आकर्षक प्रवेश द्वार तैयार किया गया है। यात्रियों के स्वागत के लिए बड़े पोर्टिको का निर्माण किया गया है, जिससे उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक प्रवेश अनुभव मिलेगा। स्टेशन परिसर में हरित क्षेत्र विकसित किए गए हैं और पैदल यात्रियों के लिए सुगम वॉकवे बनाए गए हैं। इससे स्टेशन की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों की आवाजाही भी अधिक सुविधाजनक होगी।
पुनर्विकसित स्टेशन की सबसे खास विशेषता इसकी सांस्कृतिक थीम है। प्रतीक्षालय और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बिहार की विश्वप्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग को आकर्षक फ्रेम में प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा स्टेशन परिसर में विरासत से प्रेरित कलाकृतियां और बिहार की पारंपरिक संस्कृति को दर्शाने वाले सजावटी तत्व शामिल किए गए हैं, जिससे यात्रियों को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन का डिजाइन केवल आधुनिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित विकास की अवधारणा को भी दर्शाता है। विक्रमशिला विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत को ध्यान में रखते हुए स्टेशन को ऐसे प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया गया है, जो अतीत की गौरवशाली परंपराओं और भविष्य की आधुनिक आकांक्षाओं के बीच एक सेतु का कार्य करेगा।
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