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सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर शाह की अहम बैठक, दार्जिलिंग मुद्दे के स्थायी समाधान पर भी नजर

सिलीगुड़ी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कई अहम बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। उनके तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे का अंतिम दिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठकों में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के साथ दार्जिलिंग पहाड़ियों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक मुद्दों के स्थायी समाधान पर चर्चा होने की संभावना है।
गृह मंत्री के कार्यक्रम के मुताबिक शाह शनिवार को सिलीगुड़ी शहर के बाहरी इलाके सुकना स्थित होटल में लगातार दो बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। इनमें पहली बैठक सीमा सुरक्षा से जुड़ी होगी, जबकि दूसरी बैठक में दार्जिलिंग पहाड़ियों के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र के राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठकों का सिलसिला सुबह करीब 11 बजे शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद शाह दोपहर लगभग 2:30 बजे बागडोगरा हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए रवाना हो सकते हैं।
सीमा सुरक्षा पर विशेष फोकस
सूत्रों के मुताबिक सीमा सुरक्षा समीक्षा बैठक में भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की मौजूदा स्थिति, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की समीक्षा की जाएगी। बैठक में सीमा सुरक्षा बल (BSF), सशस्त्र सीमा बल (SSB), खुफिया एजेंसियों और पश्चिम बंगाल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सिलीगुड़ी की भौगोलिक स्थिति इस बैठक को खास महत्व देती है। शहर के आसपास का क्षेत्र नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब है। इसके अलावा सिलीगुड़ी कॉरिडोर देश के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला बेहद संकरा और रणनीतिक मार्ग है। इसे आम तौर पर ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है। इस कॉरिडोर की सुरक्षा में किसी भी तरह की कमजोरी का असर पूर्वोत्तर के साथ देश की सड़क, रेल और अन्य संपर्क व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
गृह मंत्री के मौजूदा दौरे के दौरान केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। शुक्रवार को शाह ने सिलीगुड़ी में SSB से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया और सीमा सुरक्षा से संबंधित कई परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र सरकार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। शाह ने शुक्रवार को इस क्षेत्र के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही। रिपोर्टों के अनुसार कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए BSF, SSB और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय पर आधारित सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस क्षेत्र में नेपाल और भूटान की सीमाओं की सुरक्षा मुख्य रूप से SSB के जिम्मे है, जबकि बांग्लादेश सीमा पर BSF की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में दोनों केंद्रीय सशस्त्र बलों के साथ राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच सूचनाओं का तेज आदान-प्रदान सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
दार्जिलिंग के राजनीतिक समाधान पर भी नजर
शाह की दूसरी अहम बैठक दार्जिलिंग पहाड़ियों के राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी बताई जा रही है। पहाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से अलग प्रशासन और राजनीतिक अधिकारों को लेकर मांगें उठती रही हैं। इनमें अलग गोरखालैंड राज्य की मांग भी प्रमुख रही है। केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों ने समय-समय पर इस मुद्दे को हल करने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई हैं। पहले दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल और बाद में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) का गठन इसी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है।
शनिवार की बैठक में पहाड़ के जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक संगठनों के नेताओं के शामिल होने की संभावना है। बैठक का प्रमुख मुद्दा लंबे समय से लंबित राजनीतिक मांगों का “स्थायी राजनीतिक समाधान” बताया जा रहा है। शाह ने चुनावी दौर में भी पहाड़ी समुदायों से जुड़े मुद्दों के स्थायी समाधान का भरोसा दिलाया था, जिसके कारण इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) के अध्यक्ष बिमल गुरुंग और महासचिव रोशन गिरि सहित पहाड़ी क्षेत्र के अन्य नेताओं के बैठक में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि बैठक में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक व्यवस्था, विकास और पहाड़ी क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांगों पर चर्चा हो सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय राजनीति का संगम
अमित शाह का सिलीगुड़ी दौरा ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर बंगाल की सुरक्षा और दार्जिलिंग की राजनीति दोनों केंद्र के लिए महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। एक तरफ सिलीगुड़ी कॉरिडोर पूर्वोत्तर के लिए जीवनरेखा की तरह है, वहीं दूसरी ओर दार्जिलिंग पहाड़ियों में राजनीतिक स्थिरता का सीधा संबंध क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ा है।
शनिवार की बैठकों से केंद्र की आगामी रणनीति के संकेत मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने और दार्जिलिंग के राजनीतिक मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह का रोडमैप तैयार होता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
तीन दिवसीय दौरे के समापन पर शाह की ये बैठकें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें सुरक्षा और राजनीति से जुड़े दो अलग लेकिन रणनीतिक रूप से जुड़े मुद्दों पर एक साथ विचार किया जाएगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा मजबूत करना जहां राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी है, वहीं दार्जिलिंग पहाड़ियों में स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रगति केंद्र के लिए क्षेत्रीय स्थिरता का अहम आधार बन सकती है।





