पश्चिम बंगाल

आरजी कर कांड में ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप पीड़िता की मां बोलीं सबूत मिटाने की हुई साजिश

Ratna Netam
9 Aug 2026 4:42 PM IST
आरजी कर कांड में ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप पीड़िता की मां बोलीं सबूत मिटाने की हुई साजिश
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कोलकाता : चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मामले में एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। रविवार को मामले की पीड़िता की मां और भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ हुई वारदात से जुड़े सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई। उन्होंने कुछ लोगों के नाम लेते हुए दावा किया कि मामले में मौजूद सबूतों के आखिरी हिस्से को भी खत्म कर दिया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और जांच के अंतिम निष्कर्ष अलग से महत्वपूर्ण होंगे।
रत्ना देबनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय ममता बनर्जी के पास स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की जिम्मेदारी भी थी और उन्होंने कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम की साजिश रची थी। यह आरोप राजनीतिक रूप से बेहद गंभीर है। हालांकि, मामले में साजिश और सबूतों से छेड़छाड़ से जुड़े पहलुओं की जांच एजेंसियों और अदालतों के स्तर पर ही अंतिम रूप से पुष्टि हो सकती है।
पीड़िता की मां ने यह भी कहा कि वह अपनी बेटी के नाम और तस्वीर को सार्वजनिक करने की अनुमति लेने के लिए राष्ट्रपति से संपर्क करेंगी। उनका कहना है कि उनकी बेटी की कोई गलती नहीं थी और वह चाहती हैं कि उसकी पहचान को सम्मान के साथ सामने लाया जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनकी बेटी को न्याय मिलेगा, लेकिन न्याय मिलने के बावजूद वह अपनी बेटी को वापस नहीं पा सकेंगी।
पीड़िता की मां ने अपनी बेटी की शिक्षा और उसके डॉक्टर बनने के सपने को भी याद किया। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद उनकी बेटी ने अपने नाम के आगे डॉक्टर शब्द नहीं लगाया था। वह कहती थी कि जब उसके नाम के साथ कई डिग्रियां होंगी, तभी वह अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाएगी। परिवार के लिए यह सपना अब एक ऐसी त्रासदी में बदल चुका है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। 9 अगस्त 2024 को अस्पताल परिसर में महिला डॉक्टर का शव मिलने के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट समेत कई संगठनों ने इस मामले को लेकर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन किया।
रविवार को भी मृत महिला डॉक्टर की स्मृति में राज्य के सरकारी अस्पतालों में दो मिनट का मौन रखा गया। डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने घटना को याद करते हुए पीड़िता के लिए न्याय की मांग दोहराई। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात अर्धसैनिक बल के जवान भी इस मौन कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस दौरान वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट की ओर से एक मेडिकल कैंप भी आयोजित किया गया। कैंप में शामिल डॉक्टरों ने कहा कि यह कार्यक्रम उस महिला डॉक्टर के लिए न्याय की मांग को दोहराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है, जिसकी ड्यूटी के दौरान बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। डॉक्टरों ने कहा कि घटना के बाद अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
आरजी कर मामले की जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर कई निर्देश दिए थे। अस्पताल में अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रही। घटना के बाद मेडिकल संस्थानों में सुरक्षा, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित माहौल को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी।
इस मामले में सियालदह सत्र अदालत ने संजय रॉय को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, पीड़िता के माता-पिता और उनके कई सहकर्मियों का लगातार कहना रहा है कि इस अपराध में केवल एक व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता और घटना के पीछे अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
मामले के साजिश वाले पहलू की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई कर रही है। यह जांच कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद आगे बढ़ी थी। पीड़िता के परिवार की ओर से लगातार यह मांग की जाती रही है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए।
आरजी कर मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश में महिलाओं की सुरक्षा, अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यस्थल पर अधिकारों को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। पीड़िता की मां के ताजा आरोपों के बाद मामले में राजनीतिक बहस भी एक बार फिर तेज हो सकती है। हालांकि, आरोपों की सच्चाई और कथित साजिश में किसकी भूमिका थी, यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा।
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