पश्चिम बंगाल

प्रिंसिपल को जमानत के बाद फूटा गुस्सा, नए आंदोलन की दी चेतावनी

Tara Tandi
17 Oct 2026 2:57 PM IST
प्रिंसिपल को जमानत के बाद फूटा गुस्सा, नए आंदोलन की दी चेतावनी
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कोलकाता: अगस्त 2024 में कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार हुई जूनियर डॉक्टर के पिता ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में एक नया आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। यह चेतावनी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में जमानत देने के बाद आई है।
शुक्रवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने घोष को जमानत दे दी। कोर्ट ने इसके लिए उनके लंबे समय तक जेल में रहने और मुकदमे की धीमी गति का हवाला दिया।
जूनियर डॉक्टर के पिता शेखर देबनाथ ने मीडिया से कहा, "मैं इसे अंत तक लड़ूंगा। अगर जरूरत पड़ी, तो मैं इस मुद्दे पर राज्य में एक नया आंदोलन शुरू करूंगा और सड़कों पर उतरूंगा।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस नए आंदोलन को मौजूदा भाजपा-नीत राज्य सरकार के खिलाफ विरोध माना जाएगा - खासकर तब, जब उनकी पत्नी और पीड़िता की मां, रत्ना देबनाथ, सत्ताधारी पार्टी की विधायक हैं - तो उन्होंने कहा कि राजनीतिक हालात उन्हें अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने से नहीं रोक सकते।
पीड़िता के पिता ने कहा, "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह सत्ताधारी दल का हिस्सा हैं। मैं न्याय के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करूंगा।"
अगस्त 2024 में जूनियर डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के बाद, आरजी कर अस्पताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान घोष वहां प्रिंसिपल थे।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सरकारी मेडिकल संस्थान में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में घोष को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पीड़िता के माता-पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मौत में प्रभावशाली लोग शामिल थे।
देबनाथ ने अब चेतावनी दी है कि वे इस नए घटनाक्रम के खिलाफ विरोध जताने के लिए फिर से सड़कों पर उतर सकते हैं और उन्होंने न्याय की अपनी मांग को दोहराया है।
कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद घोष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शुक्रवार को राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने मुकदमे की धीमी प्रगति पर गौर किया। पीठ ने गौर किया कि भले ही घोष दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं, लेकिन इस मामले में बताए गए 147 गवाहों में से बहुत कम लोगों के ही बयान दर्ज किए गए हैं।
लंबे समय तक हिरासत में रहने और अदालती कार्यवाही की धीमी गति को देखते हुए, अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। इस फैसले के बाद, पीड़ित के पिता ने पश्चिम बंगाल में एक और दौर के विरोध-प्रदर्शन की संभावना जताई है।
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