पश्चिम बंगाल

बंगाल में 2.50 लाख लोगों को नागरिकता देने की तैयारी

Kavita2
2 Nov 2026 6:30 AM IST
बंगाल में 2.50 लाख लोगों को नागरिकता देने की तैयारी
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत करीब 2.50 लाख लोगों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया तेज करने का दावा सामने आया है। खबर के अनुसार, नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले पात्र लोगों की सुनवाई 31 दिसंबर तक पूरी करने और उन्हें नागरिकता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इस घोषणा को राज्य की राजनीति और नागरिकता से जुड़े मुद्दों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। विशेष रूप से यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुनवाई पूरी करने की समयसीमा किस सक्षम प्राधिकरण ने निर्धारित की है और कितने आवेदनों पर वास्तव में कार्रवाई लंबित है।

इस खबर में एक महत्वपूर्ण तथ्यात्मक सुधार भी जरूरी है। शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। इसलिए राज्य सरकार की ओर से नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करने का दावा सही नहीं माना जा सकता।

हालांकि, 1 नवंबर 2026 को प्रकाशित पीटीआई और अन्य प्रमुख समाचार संस्थानों की रिपोर्टों में शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बताया गया है। इन रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मतुआ गोसाईं सम्मेलन में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक लगभग 25 हजार लोगों को सीएए के तहत नागरिकता प्रमाणपत्र मिल चुके हैं, जबकि करीब ढाई लाख आवेदकों की सुनवाई पूरी की जानी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन इस प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए प्रयास करेगा। उनके मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य सरकार और जिला प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी पात्र आवेदक नागरिकता प्राप्त करने से वंचित नहीं रहेगा। हालांकि, नागरिकता प्रमाणपत्र जारी करना संबंधित सक्षम प्राधिकरण की जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा।

इस घोषणा का सबसे अधिक महत्व मतुआ समुदाय के लिए माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, नदिया और अन्य जिलों में मतुआ समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है। इस समुदाय के अनेक परिवारों की ऐतिहासिक जड़ें वर्तमान बांग्लादेश से जुड़ी हैं। लंबे समय से नागरिकता और पहचान से संबंधित मुद्दे समुदाय की प्रमुख चिंताओं में शामिल रहे हैं। ठाकुरनगर को मतुआ समुदाय का महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र माना जाता है।

सम्मेलन के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने मतुआ समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये की सहायता देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि चालू वित्त वर्ष में समुदाय के विकास से संबंधित कार्यों पर खर्च की जाएगी। इसके साथ ही मतुआ विकास बोर्ड के पुनर्गठन की बात भी कही गई। सरकार की ओर से समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अतिरिक्त कदम उठाने का आश्वासन दिया गया।

मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र नागरिकता प्राप्तकर्ताओं को जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की बात भी कही। विशेष रूप से नामशूद्र समुदाय के लोगों के लिए यह घोषणा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन पात्र व्यक्तियों को सीएए के तहत भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, उनके जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों का भी समाधान किया जाएगा। इससे संबंधित सरकारी योजनाओं और सुविधाओं तक उनकी पहुंच आसान हो सकती है।

शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध किया और मतुआ समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार समुदाय से किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये आरोप मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान हैं।

नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के उन लोगों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का विशेष प्रावधान है, जो कानून में निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में इस कानून से संबंधित नियम अधिसूचित किए थे, जिसके बाद आवेदन और नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदकों को निर्धारित दस्तावेज और अन्य आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करानी होती हैं। आवेदन की जांच तथा सत्यापन के बाद सक्षम प्राधिकरण पात्रता के आधार पर निर्णय लेता है। इसलिए केवल आवेदन जमा करने से नागरिकता स्वतः प्राप्त नहीं होती। सरकार द्वारा घोषित समयसीमा को प्रशासनिक लक्ष्य के रूप में देखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सीएए के तहत नागरिकता प्राप्त करने वाले पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी में प्रस्तावित मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए निर्वाचन आयोग के नियमों और निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा ठाकुरनगर को नगरपालिका का दर्जा देने की संभावना पर भी विचार करने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि अगले राज्य बजट में इस संबंध में कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने बरुणी मेले के आयोजन और मतुआ समुदाय के धार्मिक स्थलों से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने का भी आश्वासन दिया।

पश्चिम बंगाल सरकार की इस घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल निर्धारित समयसीमा के भीतर लंबित आवेदनों का निस्तारण है। करीब ढाई लाख आवेदनों की सुनवाई पूरी करने के लिए प्रशासनिक समन्वय, दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित प्राधिकरणों की सक्रिय भूमिका आवश्यक होगी।

फिलहाल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 31 दिसंबर 2026 तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य घोषित किया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कितने आवेदकों की सुनवाई पूरी होती है और कितने पात्र व्यक्तियों को नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। इस घोषणा से नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे आवेदकों, विशेषकर मतुआ समुदाय के लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं।

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