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पश्चिम बंगाल: विधायकों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान शुक्रवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने उद्घाटन सत्र के बाद अचानक कार्यक्रम से वॉकआउट कर दिया। यह घटना न्यू टाउन स्थित विश्व बंगला कन्वेंशन सेंटर में हुई, जहां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्य विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ हुई थी। इसके बाद विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं और सदन की कार्यप्रणाली के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा था। इसी दौरान सियासी तनाव तब बढ़ गया जब कुणाल घोष ने कार्यक्रम छोड़ने का फैसला किया।
बाहर आकर उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं के बयान सुनना या न सुनना उनका व्यक्तिगत निर्णय है, और इसी कारण उन्होंने कार्यक्रम से बाहर निकलने का फैसला किया। कुणाल घोष ने लोकसभा स्पीकर और विधानसभा स्पीकर पर तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों को अयोग्य ठहराने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है, जो गलत है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा में उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया और उनके साथ अन्याय हुआ। घोष ने कहा कि वे संसदीय संस्थाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की बातें सुनने से इनकार करते हैं। कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और अन्य नेताओं के भाषण भी हुए। इसी बीच कुणाल घोष ने मंच छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से विधानसभा और संसद की कार्यवाही को समझते आए हैं, इसलिए उन्हें किसी से संसदीय ज्ञान लेने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें सीखना होगा तो वे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय से सीखेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह वॉकआउट सिर्फ कार्यक्रम से दूरी नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे अंदरूनी संघर्ष का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद अब केवल पार्टी स्तर तक सीमित नहीं रहकर विधानसभा और संसदीय मंचों तक पहुंचता दिख रहा है, जिससे बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।





