पश्चिम बंगाल

TMC नाम और चुनाव चिह्न पर EC के आदेश से सियासत तेज, ममता गुट ने जताई आपत्ति

Kavita2
18 Sept 2026 9:49 AM IST
TMC नाम और चुनाव चिह्न पर EC के आदेश से सियासत तेज, ममता गुट ने जताई आपत्ति
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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने फैसले पर आपत्ति जताई है, जबकि बागी गुट ने आयोग के कदम का स्वागत किया है।

निर्वाचन आयोग ने आगामी विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए अंतरिम व्यवस्था के तहत TMC के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। आयोग के आदेश के अनुसार, पार्टी के दोनों गुटों में से किसी को भी फिलहाल तृणमूल कांग्रेस नाम और इस चुनाव चिह्न का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।

यह फैसला पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों को देखते हुए लिया गया है। इन सीटों पर छह अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। आयोग के निर्देश के बाद इन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से ममता बनर्जी द्वारा बनाए गए TMC के ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से हटा दिया गया है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने निर्वाचन आयोग के इस अंतरिम आदेश को कानून के खिलाफ बताया है। गुट का कहना है कि पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर इस तरह का फैसला उचित प्रक्रिया के बिना नहीं लिया जाना चाहिए। ममता गुट की ओर से इस मामले में आगे कानूनी विकल्पों पर विचार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं, बागी गुट ने निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि आयोग ने निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाते हुए अंतरिम व्यवस्था की है। बागी गुट का मानना है कि जब तक विवाद का अंतिम समाधान नहीं होता, तब तक दोनों पक्षों को पुराने नाम और चिह्न के इस्तेमाल से रोकना उचित कदम है।

राजनीतिक दलों के बीच विभाजन या नेतृत्व को लेकर विवाद की स्थिति में चुनाव चिह्न और पार्टी नाम का मामला महत्वपूर्ण हो जाता है। निर्वाचन आयोग ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के दावों, संगठनात्मक समर्थन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर फैसला करता है।

TMC पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से एक है और ‘जोड़ा फूल’ उसका लंबे समय से चुनावी प्रतीक रहा है। ऐसे में नाम और चिह्न को लेकर विवाद पार्टी की राजनीतिक पहचान से जुड़ा बड़ा मुद्दा माना जा रहा है।

इससे पहले भी कई राजनीतिक दलों में टूट के बाद चुनाव चिह्न को लेकर विवाद सामने आए हैं। ऐसे मामलों में आयोग की भूमिका यह तय करना होती है कि किस गुट को पार्टी की आधिकारिक पहचान दी जाए। हालांकि, अंतिम निर्णय आने तक कई बार अंतरिम व्यवस्था लागू की जाती है।

फिलहाल TMC के दोनों गुटों के बीच विवाद जारी है और उपचुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। आयोग के अंतिम फैसले तक दोनों पक्षों को वैकल्पिक तरीके से चुनाव मैदान में उतरना पड़ सकता है।

नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों में अब उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। चुनाव चिह्न मतदाताओं के लिए पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम होता है, इसलिए किसी भी बदलाव का चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है।

फिलहाल निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों पक्षों की नजर आगे की सुनवाई और अंतिम निर्णय पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

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