पश्चिम बंगाल

TMC छोड़ने के बाद भी नहीं बनी बात, बागी गुट में फूट के संकेत

Ratna Netam
4 Aug 2026 9:08 PM IST
TMC छोड़ने के बाद भी नहीं बनी बात, बागी गुट में फूट के संकेत
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पश्चिम बंगाल : राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर बने बागी गुट में अब अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। मंगलवार को संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की साप्ताहिक संसदीय बैठक ‘मंगल मिलन’ में बागी गुट के तीन सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। इन सांसदों के बैठक से दूर रहने को लेकर कई तरह के राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं, जिससे बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, TMC से अलग होकर बने 20 सांसदों के समूह में शामिल जंगीपुर से खलीलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से अबू ताहिर खान और बहरामपुर से यूसुफ पठान इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे पहले 28 जून को हुई NDA संसदीय दल की पहली ‘मंगल मिलन’ बैठक में भी इन तीनों सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया था। लगातार दूसरी बार उनकी गैरमौजूदगी ने बागी गुट की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद अबू ताहिर खान ने स्पष्ट किया कि उनका NDA या भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे NDA के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में जाने की कोई योजना है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके संसदीय क्षेत्र के विकास से जुड़ी कोई बैठक होगी तो उसमें वे अवश्य भाग लेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि वे किसी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे जिसे मुस्लिम समुदाय के हितों के खिलाफ माना जाए।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इन तीनों सांसदों के संसदीय क्षेत्र मुस्लिम बहुल हैं और स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के बीच भाजपा से संभावित नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे थे। माना जा रहा है कि अपने वोट बैंक की नाराजगी से बचने के लिए इन सांसदों ने NDA की बैठक से दूरी बनाई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि TMC से अलग हुए 20 सांसदों के नए समूह को लोकसभा में आधिकारिक मान्यता मिलने का मामला अभी लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। दलबदल विरोधी कानून के तहत अलग समूह को मान्यता पाने के लिए मूल संसदीय दल के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में यदि बागी गुट के भीतर ही मतभेद बढ़ते हैं तो उनकी रणनीति पर असर पड़ सकता है।
इस बीच बागी गुट के फ्लोर लीडर सुदीप बंद्योपाध्याय पहली बार NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में शामिल हुए। पिछली बैठक में वे मौजूद नहीं थे। बैठक के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि समूह पूरी तरह एकजुट है और किसी प्रकार के मतभेद की खबरें सही नहीं हैं। उन्होंने बैठक को सकारात्मक अनुभव बताते हुए कहा कि सभी सांसद मिलकर आगे की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई केंद्रीय मंत्री और NDA के सहयोगी दलों के नेता मौजूद रहे। बैठक में जनता दल (यूनाइटेड), जनता दल (सेक्युलर), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना और अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
बैठक के दौरान भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बगल में बैठे दिखाई दिए। यह बैठक ऐसे समय हुई जब बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक NDA की बैठक को आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर जारी राजनीतिक उठापटक और बागी गुट में सामने आ रहे मतभेद आने वाले समय में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बागी सांसद आगे किस राजनीतिक रास्ते का चुनाव करते हैं और लोकसभा में उनके समूह को आधिकारिक मान्यता मिलती है या नहीं।
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