पश्चिम बंगाल

रेजीनगर उपचुनाव में नया सियासी दांव, BJP के खिलाफ TMC ने कांग्रेस-वामदलों से मांगा साथ

Kavita2
4 Oct 2026 11:49 AM IST
रेजीनगर उपचुनाव में नया सियासी दांव, BJP के खिलाफ TMC ने कांग्रेस-वामदलों से मांगा साथ
x

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान अंतिम दौर में पहुंच गया है। दोनों सीटों पर मुकाबला कई राजनीतिक दलों के बीच है, लेकिन रेजीनगर में चुनावी समीकरण खास तौर पर चर्चा में हैं। मुस्लिम बहुल इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को चुनौती देने के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस खेमे ने कांग्रेस और वामदलों से विपक्षी एकजुटता की अपील की है।

रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस की ओर से यह अपील ऐसे समय की गई है, जब चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है। पार्टी का कहना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर मतदान केंद्रों की सुरक्षा और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए साथ आना चाहिए। तृणमूल की इस अपील ने उपचुनाव के राजनीतिक समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है।

रेजीनगर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 65 फीसदी बताई जाती है। ऐसे में इस सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं का रुख चुनाव परिणाम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा भी इस बार इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने हाल में मुस्लिम मतदाताओं के बीच प्रचार किया और विकास के मुद्दे पर समर्थन मांगा।

भाजपा की ओर से रेजीनगर में धार्मिक ध्रुवीकरण के बजाय विकास और सीधे संवाद पर जोर देने की कोशिश दिखाई दे रही है। सामिक भट्टाचार्य ने मुस्लिम बहुल इलाके में आयोजित सभा में पार्टी के पक्ष में मतदान की अपील की। भाजपा के इस रुख को पार्टी की चुनावी रणनीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस और वामदलों से साथ आने की अपील की है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि विपक्षी दलों को मतदान केंद्रों की निगरानी और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए। यह अपील सीधे तौर पर भाजपा को चुनावी चुनौती देने की रणनीति से जुड़ी दिखाई देती है।

हालांकि रेजीनगर में विपक्षी एकजुटता की राह आसान नहीं है। कांग्रेस और वामदलों की अपनी चुनावी रणनीति और उम्मीदवार हैं। CPI(M) ने रेजीनगर से सैयद असद अली को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर कांग्रेस भी इस सीट से अपना उम्मीदवार मैदान में उतार चुकी है। ऐसे में तृणमूल की अपील को तत्काल चुनावी गठबंधन के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

रेजीनगर का चुनावी मुकाबला इस बार कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है। भाजपा सत्ता में है और पहली बार इन उपचुनावों के जरिए अपने शासन के बाद मतदाताओं के बीच समर्थन का परीक्षण कर रही है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस अपने राजनीतिक आधार को बनाए रखने की कोशिश में है। कांग्रेस और वामदल भी अपने लिए राजनीतिक जगह तलाश रहे हैं।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी रेजीनगर को लेकर मतभेद सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तृणमूल से जुड़े अलग-अलग खेमों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इससे पार्टी के सामने आंतरिक चुनौती भी बनी हुई है।

रेजीनगर उपचुनाव की तारीख 6 अक्टूबर तय है और मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। यह उपचुनाव उस राजनीतिक बदलाव के बाद हो रहा है, जिसमें पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आई है। इसलिए दोनों सीटों के परिणाम राज्य की राजनीति में आगे के समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

नंदीग्राम भी इस चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण सीट है। यहां मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीट खाली की है और भाजपा ने अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर कांग्रेस और वामदल भी चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम में मुकाबला अलग राजनीतिक समीकरणों के बीच है, जबकि रेजीनगर में मुस्लिम बहुल मतदाता आधार चुनावी रणनीतियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

रेजीनगर में तृणमूल की विपक्षी एकजुटता की अपील के पीछे मतदान केंद्रों की सुरक्षा का मुद्दा भी है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा की ओर से बूथों पर दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि यह तृणमूल का आरोप है और भाजपा ने विपक्ष के ऐसे आरोपों को खारिज किया है। चुनाव प्रक्रिया में वास्तविक स्थिति का आकलन चुनाव आयोग की निगरानी और मतदान के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से होगा।

भाजपा ने भी रेजीनगर में अपनी रणनीति को व्यापक बनाने की कोशिश की है। पार्टी के नेताओं ने मुस्लिम मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाई है और विकास से जुड़े मुद्दों को सामने रखा है। सामिक भट्टाचार्य ने कहा है कि पार्टी धर्म के आधार पर मतदाताओं में अंतर नहीं करती। वहीं प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी अल्पसंख्यक मतदाताओं से समर्थन की अपील की है।

इस चुनाव में SIR से जुड़े मतदाता सूची के मुद्दे का असर भी दिखाई दे रहा है। रेजीनगर और नंदीग्राम दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में SIR से संबंधित अपीलें लंबित होने की रिपोर्ट सामने आई है। रेजीनगर में 12 हजार से अधिक और नंदीग्राम में 6 हजार से अधिक अपील लंबित बताई गई हैं। मतदाता सूची से जुड़े इन मामलों के कारण चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ी हुई है।

मतदाता सूची के मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है। ऐसे में उपचुनाव के दौरान SIR और मतदाता अधिकारों का मुद्दा भी प्रचार का हिस्सा बन गया है। तृणमूल की ओर से कांग्रेस और वामदलों को साथ आने की अपील इसी व्यापक राजनीतिक माहौल में सामने आई है।

हालांकि कांग्रेस और वामदल तृणमूल के साथ औपचारिक रूप से चुनावी समझौते में नहीं हैं। रेजीनगर में CPI(M) का उम्मीदवार मैदान में है और कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। इसलिए तृणमूल की अपील का व्यावहारिक असर कितना होगा, यह मतदान के दिन ही स्पष्ट होगा।

तृणमूल कांग्रेस की रणनीति में एक तरफ भाजपा के खिलाफ विपक्षी वोटों के बंटवारे को कम करने की कोशिश दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ भाजपा अपने लिए नए मतदाता समूहों तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रही है। दोनों पक्षों की रणनीति में रेजीनगर के मुस्लिम मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भाजपा के लिए यह उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी राज्य में सत्ता में आने के बाद पहली बार इन विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी परीक्षा का सामना कर रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के लिए यह अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का अवसर है। कांग्रेस और वामदल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मैदान में हैं।

चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में नेताओं की सभाएं और मतदाताओं से संपर्क अभियान तेज हो गया है। रेजीनगर में राजनीतिक दल स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य की व्यापक राजनीति को भी चुनावी बहस का हिस्सा बना रहे हैं। ऐसे में आने वाले दो दिन प्रचार और राजनीतिक संदेशों के लिहाज से अहम रहने वाले हैं।

तृणमूल कांग्रेस की विपक्षी एकजुटता की अपील के पीछे यह संदेश है कि भाजपा के खिलाफ चुनावी मैदान में मौजूद दलों को कम से कम मतदान प्रक्रिया की निगरानी और बूथों की सुरक्षा के मुद्दे पर सहयोग करना चाहिए। वहीं कांग्रेस और वामदलों की अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं हैं, जिसके चलते इस अपील का स्वरूप और प्रभाव फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

कुल मिलाकर रेजीनगर उपचुनाव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। मुस्लिम बहुल इस सीट पर भाजपा अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस और वामदलों से विपक्षी एकजुटता की अपील की है। 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को परिणाम के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने इन अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियों में से किसे समर्थन दिया। फिलहाल अंतिम दौर के प्रचार में रेजीनगर राज्य की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल हो गई है।

Next Story